सोशल मीडिया, यूट्यूब और इस तरह के दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपने कई बार सोने से बनी कारों के वीडियो या इमेजेस को देखा होगा। दुबई और अबू धाबी के कई सारे शेखों के पास सोने बनी कारें हैं। हालांकि इन सोने से बनी कारों को लेकर लोगों के मन में अक्सर इस तरह के सवाल आते हैं कि आखिर इन कारों को बनाया कैसे जाता है? या फिर इन कारों को कैसे मैन्युफैक्चर किया जाता है? क्या इस तरह की कारों को कंपनी ही बनाती है या फिर इसे बाद में खुद से मोडिफाई किया जाता है? आइये जानते हैं इन सभी सवालों से जुड़े जवाब।
कैसे बनती है सोने की कार?
अगर आप ऐसा सोचते हैं कि सोने से बनी कारों को कार कंपनियां ही मैन्युफैक्चर करती हैं यानी बनाती हैं या फिर स्पेशल ऑर्डर देकर इन कारों को बनावाया जा सकता है तो आप गलत हैं। दरअसल पहले कारों को खरीदा जाता है और फिर बाद में इन कारों को गोल्ड कार में मोडिफाई किया जाता है। कारों के मालिक अपनी हिसाब से इन गोल्ड कारों के एक्सटीरियर और इंटीरियर को मोडिफाई करवाते हैं। कार मकैनिक उनकी कारों को गोल्डन कार में तब्दील करते हैं।
गोल्ड कार बनाने वाले ज्यादातर मकैनिक दुबई से आते हैं। इनमें से ज्यादातर मकैनिक निजी तौर पर वहां के शेखों के लिए काम करते हैं। जिनके द्वारा बड़ी ही बारीकी से किसी नॉर्मल कार को गोल्ड कार में मोडिफाई किया जाता है। सोने की कार पूरी तरह से गोल्ड की नहीं होती है। इन कारों पर ज्यादातर गोल्ड को कैमिकल में मिलाकर एक सॉल्यूशन तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे हाई टंप्रेचर पर कार पर स्प्रे किया जाता है। बाद में इन कारों को पॉलिश किया जाता है यानी इन कारों पर सोने का पानी चढ़ाया जाता है। इसके बाद इनको पॉलिश करके चमकाया जाता है।
एक कार बनाने में इस्तेमाल होता है इतना सोना
नॉर्मल तौर पर एक गोल्ड कार को बनाने में कम से कम 500 ग्राम तक सोने का इस्तेमाल होता है। कुछ शौकीन लोग गोल्ड कार को मोडिफाई कराने के लिए दो किलो तक सोने का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि ज्यादा पुरानी हो जाने के बाद दुबई के शेखों के द्वारा इन गोल्ड कारों को बेच भी दिया जाता है। दुबई के बाजारों में आपको आसानी से सेकेंड हैंड गोल्ड कारें बिकती हुई दिख जाएंगी।