उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के शक्तिनगर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को फिर से उजागर कर दिया है। मानवता को भी शर्मसार करने वाली इस घटना से स्थानीय लोगों में सरकारी तंत्र के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है। मामला शक्तिनगर थाना क्षेत्र के चिल्काडाड का है, जब एक 70 साल के बुजुर्ग शख्स को कागजों में मारा हुआ घोषित कर दिया गया। सरकारी तंत्र की ऐसी मार बुजुर्ग कांता पांडेय पर पड़ी कि उसे मिलने वाली सरकारी मदद- वृद्धा पेंशन और राशन दोनों ही बंद हो गए। जब इस बात की जानकारी बुजुर्ग को हुई, तो वो सरकारी दफ्तरों के चक्कार लगाने लगा।
पिछले 18 महीनों से भूख-प्यास से बेहाल वो बुजुर्ग अपने आप को कागजों में जिंदा साबित करने के लिए दर-दर की ढोकरें खाता रहा और आखिरकार बुधवार 13 नंबर को उसकी बिमारी से मौत हो गई। उसकी माली हालत इतनी खराब थी कि पड़ोसी और स्थानीय लोगों ने चंदा जमा कर उस बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया।
जिला अधिकारी से लेकर पोर्टल तक नहीं हुई सुनवाई
ग्राम पंचायत में जिंदा शख्स को मृत्य बताकर उसकी वृद्धा पेंशन और राशन रोकने का आदेश पिछले महीने अक्टूबर में आया था, जिसकी शिकायत वृद्ध व्यक्ति कांता पांडेय ने जिला अधिकारी से लेकर पोर्टल तक पर दर्ज कराई, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
कई बार उच्च अधिकारियों से कहने और सोशल मीडिया पर डालने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई और असहाय वृद्ध व्यक्ति दर-दर भटकता रहा। यहां तक की सस्ते सरकारी राशन गल्ले की दुकान पर भी उसे राशन तक नहीं मिलता था।
समाज कल्याण विभाग की उदासीनता भी इससे उजागर हो गई। इसी जिले के इसी विधानसभा के विधायक और समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव गोंड हैं। तब भी सरकारी योजना का लाभ वृद्ध कांता पांडेय को नहीं मिल पा रहा था। वहीं सरकारी व्यवस्था की आस में बुधवार को सुबह कांता पांडेय की अचानक तबियत बिगड़ने से मृत्यु हो गई, जिससे पूरा परिवार शोक में है।
गल्ले की दुकान पर खो गया था राशन कार्ड
मृतक के बेटे गोपाल पांडेय ने बताया कि 13 नवंबर 2042 को हमारे पिता कांता पाण्डेय का देहांत हो गया है, लेकिन उससे पहले 2020 में कोरोना काल के समय सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर अपना राशन कार्ड लेकर राशन लेने गए थे, जहां पर राशन कार्ड गल्ले की दुकान से गायब हो गया। उसी समय से गल्ला भी नहीं मिल रहा था।
मृतक की पत्नी ने बताया कि अधिकारियों ने करीब 18 महीने पहले हमारे पति को मृत घोषित कर दिया था, जिससे वृद्ध पेंशन भी बंद कर दी गई। घर में खाने के लिए एक दाना भी नहीं होता था। हमें भूखा देख आसपास के लोग अपने घरों का बचा हुआ खाना हमें देने लगे थे। कई कई बार अधिकारियों को अपने जिंदा होने का प्रमाण पत्र भी दिया गया पर अधिकारियों ने एक न सुनी, जिसके बाद बचीकुची आस भी छूट गई। अब हमारे पति का देहांत हो गया।
कांता का बेटा एक पैर से दिव्यांग है और अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मध्य प्रदेश के सिंगरौली में रहकर किसी तरह से जीवन यापन करता है। उसने बताया कि कोरोना कल के समय राशन की दुकान से राशन कार्ड गायब हो जाने के बाद से राशन भी मिलना बंद हो गया था। ऐसे में लगातार अधिकारियों से हाथ जोड़ विनती करने के बावजूद राशन कार्ड नहीं बन पाया और जिसकी वजह से राशन नहीं मिल रहा है।
इसके कुछ समय बाद पिता को आ रही पेंशन भी बंद हो गई। जब इस मामले में अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगाए, तो पता चला कि हमारे पिताजी को मृत घोषित कर दिया और उनकी पेंशन भी बंद कर दी गई है।