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खुद को जिंदा साबित करने के लिए दर-दर भटकता रहा 70 साल का बुजुर्ग, चली गई जान! लोगों ने चंदा जमा कर किया अंतिम संस्कार

Sonbhadra News: पिछले 18 महीनों से भूख-प्यास से बेहाल वो बुजुर्ग अपने आप को कागजों में जिंदा साबित करने के लिए दर-दर की ढोकरें खाता रहा और आखिरकार बुधवार 13 नंबर को उसकी बिमारी से मौत हो गई। उसकी माली हालत इतनी खराब थी कि पड़ोसी और स्थानीय लोगों ने चंदा जमा कर उस बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 14, 2024 पर 6:27 PM
खुद को जिंदा साबित करने के लिए दर-दर भटकता रहा 70 साल का बुजुर्ग, चली गई जान! लोगों ने चंदा जमा कर किया अंतिम संस्कार
खुद को जिंदा साबित करने के लिए दर-दर भटकता रहा 70 साल का बुजुर्ग, चली गई जान! लोगों ने चंदा जमा कर किया अंतिम संस्कार

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के शक्तिनगर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को फिर से उजागर कर दिया है। मानवता को भी शर्मसार करने वाली इस घटना से स्थानीय लोगों में सरकारी तंत्र के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है। मामला शक्तिनगर थाना क्षेत्र के चिल्काडाड का है, जब एक 70 साल के बुजुर्ग शख्स को कागजों में मारा हुआ घोषित कर दिया गया। सरकारी तंत्र की ऐसी मार बुजुर्ग कांता पांडेय पर पड़ी कि उसे मिलने वाली सरकारी मदद- वृद्धा पेंशन और राशन दोनों ही बंद हो गए। जब इस बात की जानकारी बुजुर्ग को हुई, तो वो सरकारी दफ्तरों के चक्कार लगाने लगा।

पिछले 18 महीनों से भूख-प्यास से बेहाल वो बुजुर्ग अपने आप को कागजों में जिंदा साबित करने के लिए दर-दर की ढोकरें खाता रहा और आखिरकार बुधवार 13 नंबर को उसकी बिमारी से मौत हो गई। उसकी माली हालत इतनी खराब थी कि पड़ोसी और स्थानीय लोगों ने चंदा जमा कर उस बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया।

जिला अधिकारी से लेकर पोर्टल तक नहीं हुई सुनवाई

ग्राम पंचायत में जिंदा शख्स को मृत्य बताकर उसकी वृद्धा पेंशन और राशन रोकने का आदेश पिछले महीने अक्टूबर में आया था, जिसकी शिकायत वृद्ध व्यक्ति कांता पांडेय ने जिला अधिकारी से लेकर पोर्टल तक पर दर्ज कराई, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।

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