Ban on Gutkha: गुटखा और पान मसाला पर बंगाल सरकार का चला हंटर, 1 साल के लिए लगाया बैन

Ban on Gutkha: पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार (28 अक्टूबर) को तंबाकू वाले गुटखा और पान मसाला के निर्माण और बिक्री पर एक साल और प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, यह प्रतिबंध 7 नवंबर, 2024 से लागू होगा। पहले यह प्रतिबंध 7 नवंबर 2024 को समाप्त हो रहा था

अपडेटेड Oct 28, 2024 पर 7:18 PM
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Ban on Gutkha: पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने गुटखा और पान मसाला उत्पादों पर प्रतिबंध बढ़ा दिया है

Bengal govt Ban on Gutkha: पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने राज्य में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला के निर्माण और बिक्री पर बैन लगा दिया है। सरकार ने एक आदेश में कहा है कि तंबाकू उत्पादों के बिक्री, भंडारण और वितरण पर एक साल के लिए रोक रहेगी। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 24 अक्टूबर को यह आदेश जन स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए जारी किया।

राज्य स्वास्थ्य विभाग का यह निर्णय 2011 के खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियमन के विभिन्न प्रावधानों के अनुरूप है, जो हानिकारक पदार्थों की बिक्री को प्रतिबंधित करता है। पहली बार यह बैन साल 2021 में लगाया गया था। उसके बाद हर साल इस प्रतिबंध को एक साल के लिए बढ़ा दिया जाता है।

अब एक बार फिर पश्चिम बंगाल सरकार ने तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला उत्पादों के निर्माण, भंडारण एवं बिक्री पर प्रतिबंध को 7 नवंबर 2024 से एक साल के लिए और बढ़ा दिया है।


आदेश के मुताबिक, "राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 30 के तहत जन स्वास्थ्य के हित में पूरे राज्य में किसी भी खाद्य पदार्थ के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर एक साल की अवधि के लिए रोक लगाने का अधिकार है।"

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30 के तहत पूरे राज्य में किसी भी खाद्य पदार्थ के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

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गुटखा और पान मसाला में तम्बाकू और निकोटीन का व्यापक उपयोग होता है। राज्य सरकारें आमतौर पर इन वस्तुओं की बिक्री से बहुत अधिक कर राजस्व अर्जित करती हैं। हालांकि, सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में देश भर के कई राज्यों ने धीरे-धीरे गुटखा और निकोटीन वाले अन्य उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाए हैं।

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