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IPO से पहले HDB Financial Services का जलवा, अनलिस्टेड मार्केट में भाग रहे हैं शेयर

HDB Financial Services IPO: HDFC Bank, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज के लिए 78,000-87,000 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन चाह रही है। वित्त वर्ष 2022-23 में HDB फाइनेंशियल सर्विसेज की लोन बुक सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 66,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Nov 15, 2024 पर 8:22 PM
IPO से पहले HDB Financial Services का जलवा, अनलिस्टेड मार्केट में भाग रहे हैं शेयर
प्रपोज्ड IPO के बावजूद HDB Financial Services, प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank की सहायक कंपनी बनी रहेगी।

HDB Financial Services IPO: HDFC Bank की सब्सिडियरी HDB फाइनेंशियल सर्विसेज जल्द ही अपना IPO लॉन्च करने जा रही है। IPO से पहले कंपनी के शेयरों में अनलिस्टेड मार्केट में बड़ी गतिविधि देखी गई है। कंपनी ने अक्टूबर में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था, जिससे पिछले महीने कंपनी के अनलिस्टेड शेयर की कीमतों में तेज उछाल आया। हालांकि कीमतें तब से कम हुई हैं, लेकिन 1,000 रुपये के मार्क से ऊपर बनी हुई हैं। यह इस दर्शाता है कि निवेशकों की HDB Financial Services के IPO और शेयरों में रुचि बनी हुई है।

HDB फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयर वर्तमान में अनलिस्टेड मार्केट में 1,295 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे हैं। 20 अक्टूबर के आसपास, शेयर 1,450 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे। HDB फाइनेंशियल सर्विसेज को शेयर बाजारों में लिस्ट कराने का फैसला भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से अक्टूबर 2022 में जारी किए गए एक आदेश का पालन करता है। इस फैसले के तहत अपर लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के तौर पर कैटेगराइज NBFC का, इस कैटेगरी में नोटिफाई किए जाने के 3 साल के अंदर यानी सितंबर 2025 तक स्टॉक एक्सचेंजेस में लिस्ट होना जरूरी है।

IPO से 12,500 करोड़ रुपये जुटाने का प्लान

कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, प्रपोज्ड IPO के बावजूद एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज, HDFC Bank की सहायक कंपनी बनी रहेगी। कंपनी का प्लान IPO से 12,500 करोड़ रुपये जुटाने का है। IPO में नए शेयरों के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल (OFD) भी रहेगा। OFS के माध्यम से HDFC Bank 10000 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेचेगा। 2500 करोड़ रुपये के नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाली इनकम का इस्तेमाल कंपनी के टियर-1 कैपिटल बेस को मजबूत करने के लिए किया जाएगा, ताकि भविष्य की पूंजी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

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