एनएसडीएल का आईपीओ 30 जुलाई को खुल गया है। कंपनी ने शेयर के लिए 760-800 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) है। इसका मतलब है कि इश्यू से जो पैसा आएगा वह कंपनी के पास नहीं जाएगा बल्कि उन प्रमोटर्स की जेब में जाएगा जो इस इश्यू के जरिए एनएसडीएल में अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इन शेयरहोल्डर्स को एनएसडीएल में अपने निवेश पर 400 गुना प्रॉफिट होने जा रहा है।
कम से कम 14,400 रुपये निवेश करना होगा
NSDL ने आईपीओ ओपन होने से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 1,201 करोड़ रुपये जुटाए हैं। LIC और अबुधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) उन एंकर इनवेस्टर्स में शामिल हैं, जिन्होंने एनएसडीएल में निवेश किया है। एनएसडीएल डिपॉजिटरी सर्विसेज ऑफर करती है। इसका मतलब है कि डीमैट अकाउंट का ऑपरेशन और मेंटेनेंस यह कंपनी करती है। आईपीओ में कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी होगी। एक लॉट 18 शेयरों का है। इसका मतलब है कि इनवेस्टर को कम से कम 14,400 रुपये का निवेश इस इश्यू में करना होगा।
आईपीओ में शेयर की कीमत अट्रैक्टिव
ब्रोकरेज फर्म आनंदराठी ने एनएसडीएल के आईपीओ में बोली लगाने की सलाह दी है। उसने कहा है कि कंपनी ने शेयरों की कीमतें अट्रैक्टिव रखी है। प्राइस बैंड के अपर बैंड पर शेयर की वैल्यूएशन FY25 की अनुमानित अर्निंग्स का 46.6 गुना है, जो पहले से मार्केट में लिस्टेड CDSL की वैल्यूएशन से कम है। आईपीओ में शेयर की कीमत के आधार पर एनएसडीएल का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 16,000 करोड़ रुपये आता है।
डिपॉजिटरीज सर्विसेज की ग्रोथ के लिए अच्छी संभावना
ब्रोकरेज फर्म एंजल वन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इनवेस्टर्स लंबी अवधि के लिए इस आईपीओ में बोली लगा सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इंडिया में सिक्योरिटीज डिपॉजिटरीज सेगमेंट के लिए ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं। कैपिटल मार्केट तक आम लोगों की पहुंच बढ़ रही है। फाइनेंशियल इनक्लूजन का विस्तार हो रहा है। सरकार रिफॉर्म्स पर फोकस कर रही है। हालांकि, एनएसडीएल को रिटेल सेगमेंट में CDSL से कड़ी टक्कर मिल रही है। एनएसडीएल का रेवेन्यू स्टॉक मार्केट एक्टिविटी पर निर्भर है, जो एक बड़ा रिस्क है।
अभी आबादी के सिर्फ 13.4 फीसदी हिस्से के पास डीमैट अकाउंट
बजाज ब्रोकिंग ने भी एनएसडीएल के आईपीओ में लंबी अवधि के नजरिए से बोली लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि FY25 में आबादी के सिर्फ 13.4 फीसदी हिस्से के पास डीमैट अकाउंट थे। इसका मतलब है कि डिपॉजिटरीज बिजनेस की ग्रोथ के लिए काफी संभावनाएं हैं। हालांकि, ट्रांजेक्शन एक्टिविटी घट रही है, इनवेस्टर्स का प्रिफरेंस बदल रहा है। सीडीसीएल से अच्छी टक्कर मिल रही है। ये एनएसडीएल के लिए रिस्क हैं।