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NSDL IPO: जल्द आ सकता है NSDL का ₹3,300 करोड़ का IPO, जानिए पूरी डिटेल

NSDL IPO: NSDL की प्रतिद्वंद्वी कंपनी सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड(CDSL) पहले से ही स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध है। वर्तमान में, CDSL के शेयर BSE पर ₹1,740 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे हैं

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jun 11, 2025 पर 4:20 PM
NSDL IPO: जल्द आ सकता है NSDL का ₹3,300 करोड़ का IPO, जानिए पूरी डिटेल
IDBI बैंक, UTI और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थानों की इसमें भागीदारी है

NSDL IPO: भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी डिपॉजिटरी कंपनी नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) जल्द ही अपना IPO लाने जा रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का लक्ष्य इस IPO से लगभग $400 मिलियन यानी करीब ₹3,300 करोड़ जुटाना है। यह IPO जुलाई 2025 की शुरुआत में आ सकता है। बता दें कि NSDL के IPO को अक्टूबर 2023 में ही SEBI से मंजूरी मिल गई थी। NSDL, कस्टडी में रखी गई संपत्तियों के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी डिपॉजिटरी है।

बता दें कि IDBI बैंक, UTI और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसे प्रमुख वित्तीय संस्थान इसे मैनेज करते है। NSDL डीमैट खातों के माध्यम से निवेशकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपनी होल्डिंग्स को मैनेज करने में मदद करती है। इसका लक्ष्य भारतीय वित्तीय बाजारों में दक्षता और सुरक्षा बढ़ाना है।

फ्रेश इश्यू या OFS कैसा होगा IPO?

कंपनी द्वारा पहले स्टॉक एक्सचेंजों के साथ किए गए फाइलिंग के अनुसार, इस IPO में कुल 5.01 करोड़ शेयर शामिल होंगे। यह एक ऑफर फॉर सेल होगा, जिसका मतलब है कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। इनमें IDBI बैंक लिमिटेड, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE), और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जैसे बड़े संस्थान शामिल हैं। इसका सीधा मतलब ये है कि NSDL कंपनी को इस IPO से कोई सीधा पैसा नहीं मिलेगा। यह पैसा उन शेयरधारकों के पास जाएगा जो अपने शेयर बेच रहे हैं। वैसे इस IPO के लिए फिलहाल प्राइस बैंड तय नहीं किया गया है।

इस IPO में ICICI सिक्योरिटीज लिमिटेड, एक्सिस कैपिटल लिमिटेड, HSBC होल्डिंग्स पीएलसी, और IDBI कैपिटल प्रमुख बुक-रनिंग लीड मैनेजर के रूप में शामिल होंगे।

NSDL की भूमिका और प्रतिद्वंद्वी

NSDL की स्थापना अगस्त 1996 में हुई थी। इसने भारतीय कैपिटल मार्केट में डीमैट रूप में रखी गई और निपटाई जाने वाली अधिकांश प्रतिभूतियों को संभालने के लिए एक अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा स्थापित किया है। भारत का कैपिटल मार्केट सौ साल से भी पुराना है, लेकिन पहले कागज-आधारित लेनदेन से शेयरों के डिलीवरी और स्वामित्व के हस्तांतरण में देरी जैसी बड़ी समस्याएं होती थीं। NSDL जैसी डिपॉजिटरी ने इन समस्याओं को दूर करने में मदद की है।

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