Sanstar IPO Listing Strategy: प्लांट-बेस्ड प्रोडक्ट्स बनाने वाली सनस्टार के शेयरों की कल 26 जुलाई को घरेलू मार्केट में लिस्टिंग होने वाली है। ग्रे मार्केट में इसके शेयरों के प्रीमियम में तेजी से गिरावट आई है लेकिन एक्सपर्ट को लिस्टिंग पर शानदार मुनाफे की गुंजाइश दिख रही है। आईपीओ खुलने से पहले ग्रे मार्केट में इसके शेयर 44 रुपये यानी 46.32 फीसदी की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर पहुंचे थे लेकिन अब यह 27 रुपये पर आ गया। हालांकि इस जीएमपी के हिसाब से 28 फीसदी से अधिक लिस्टिंग गेन की गुंजाइश दिख रही है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और लिस्टिंग के दिन मार्केट के सेंटिमेंट से ही लिस्टिंग गेन तय होता है। आईपीओ के तहत 95 रुपये के भाव पर शेयर जारी हुए हैं।
एक्सपर्ट का क्या है रुझान?
पेस 360 के को-फाउंडर और चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोएल का मानना गै कि इसके शेयर करीब 125-130 रुपये के भाव पर लिस्ट हो सकते हैं यानी कि करीब 33 फीसदी का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। लिस्टिंग के बाद उन्होंने आईपीओ निवेशकों को मुनाफा बुक करने की सलाह दी है।
Sanstar IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस
क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज का ₹510.15 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 19-23 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 82.99 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 145.68 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 136.49 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 24.23 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत 397.10 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा 2 रुपये की फेस वैल्यू वाले 1.19 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कर्ज चुकाने, फैसिलिटी के विस्तार और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।
वर्ष 1982 में बनी सनस्टार प्लांट-बेस्ड प्रोडक्ट्स और इनग्रेडिएंट तैयार करती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में लिक्विड ग्लूकोज, ड्राईड ग्लूकोज सॉलिड्स, माल्टोडेक्स्ट्रिन पाउडर, डेक्स्ट्रोज मोनोहाइड्रेट, मक्के का स्टार्च के साथ-साथ बाई-प्रोडक्ट्स जैसे कि जर्म, ग्लूटेन, फाइबर और फोर्टिफाइड प्रोटीन हैं। इनका इस्तेमाल फूड प्रोडक्ट्स, पेट फूड प्रोडक्ट्स और इंडस्ट्री में होता है। इसके दो मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं, एक तो महाराष्ट्र के धुले में और दूसरा गुजरात के कच्छ में। सालामा 3.63 टन की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी के साथ कॉर्न-बेस्ड स्पेशल्टी प्रोडक्ट्स और इनग्रेडिएंट्स बनाने वाली देश की पांचवी सबसे बड़ी कंपनी है। इसके प्रोडक्ट्स का 49 देशों को निर्यात होता है।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022 में इसे 15.92 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले वित्त वर्ष 2023 में उछलकर 41.81 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024 में 66.77 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू सालाना 46 फीसदी से अधिक की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 1,081.68 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।