SBFC Finance IPO: सबसे अधिक एसेट मैनेज करने वाली NBFC में शुमार SBFC Finance का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 3 अगस्त को खुल गया है। आईपीओ खुलने से पहले 37 एंकर निवेशकों से यह 304 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। एंकर निवेशकों को 57 रुपये के भाव पर 5.34 करोड़ इक्विटी शेयर जारी हुए हैं। वहीं ग्रे मार्केट की बात करें तो इसके शेयर दमदार स्थिति में दिख रहे हैं। आईपीओ के प्राइस बैंड के अपर प्राइस के हिसाब से यह 40 रुपये की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फाइनेंशियल्स और फंडामेंटल्स के आधार पर निवेश का फैसला लेना चाहिए। यहां आईपीओ से जुड़ी पूरी डिटेल्स के साथ-साथ इसमें निवेश को लेकर पॉजिटिव-निगेटिव और एक्सपर्ट का रुझान बताया जा रहा है।
SBFC Finance IPO की डिटेल्स
एसबीएफसी फाइनेंस के आईपीओ में 7 अगस्त तक पैसे लगा सकते हैं। इस इश्यू के लिए 54-57 रुपये का प्राइस बैंड और 13 शेयरों का लॉट फिक्स किया गया है। एंप्लॉयीज को हर शेयर पर 2 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा। 1025 करोड़ रुपये के इस इश्यू के तहत 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 600 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे और बाकी 425 करोड़ रुपये के शेयरों की ऑफर फॉर सेल (OFS) विंडो के तहत बिक्री होगी। आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 10 अगस्त को फाइनल होगा और मार्केट में 16 अगस्त को लिस्टिंग होगी। इश्यू के लिए रजिस्ट्रार केफिन टेक है। नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कैपिटल बेस को बढ़ाने में होगा।
क्या है SBFC Finance IPO के निगेटिव प्वाइंट
आईपीओ में पैसे लगाने वाले एक निवेशक का कहना है कि यह कंपनी 5 लाख-30 लाख रुपये के टिकट साइज को सर्व करती है जिसमें राष्ट्रीय स्तर का कोई भी वित्तीय संस्थान नहीं है। इस टिकट साइज की एसबीएफसी फाइनेंस के एयूएम में 87 फीसदी हिस्सेदारी है। यह इसकी मजबूती है लेकिन एक बड़ा रिस्क भी है। मार्च 2023 के आंकड़ों के मुताबिक इसके सिक्योर्ड एमएसएमई लोन के टोटल एयूएम में 81.33 फीसदी हिस्सेदारी सेल्फ-एंप्लॉयड कस्टमर्स की है, जिन्हें लोन बांटने के लिहाज से हाई रिस्क वाला माना जाता है। एमएसएमई को भी लोन देना कॉरपोरेट की तुलना में हाई रिस्क का है। वहीं प्रॉपर्टी गिरवी रखकर लोन देना सिक्योर्ड प्रोडक्ट तो है लेकिन रिकवरी प्रक्रिया बहुत लंबी होती है क्योंकि इसमें कई कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
कंपनी के एसेट क्वालिटी की बात करें तो इनक्रेड कैपिटल के रिसर्च डायरेक्टर जिग्नेश शियाल का मानना है कि किसी भी वित्तीय संस्थान के क्रेडिट और बैड लोन के बारे में कुछ कहने से पहले इसे कम से कम 10-15 साल पुराना होना चाहिए। वहीं एसबीएफसी फाइनेंस अभी सिर्फ छह साल का ही है। जिग्नेश के मुताबिक कोरोना के दौरान इस पर दबाव दिखा था लेकिन सरकार ने संभाल लिया। इसके बाद दो-तीन साल में अपने बुक को तैयार किया तो ऐसे में इसके एनपीए रेश्यो के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। अब आंकड़ों की बात करें तो इसके एसेट क्वालिटी में लगातार सुझार दिखा है और वित्त वर्ष 2023 में इसका ग्रॉस एनपीए सालाना आधार पर 0.31 फीसदी गिरकर 2.43 फीसदी और नेट एनपीए 0.22 फीसदी गिरकर 1.41 फीसदी पर आ गया। हालांकि इसका एयूएम 4900 करोड़ रुपये ही है तो एसेट क्वालिटी में सुधार बहुत छोटे बेस पर है।
स्वास्तिक इनवेस्टमार्ट की एनालिस्ट अनुभूति मिश्रा का कहना है कि इसके फंड की लागत बढ़ रही है और इस प्रकार कर्ज भी बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2022 में इसका आउटस्टैंडिंग डेट 7.65 फीसदी की दर से 2948 करोड़ रुपये था जो अगले वित्त वर्ष में 8.2 फीसदी की औसतन दर के 3745 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। अनुभूति के मुताबिक निवेशकों को इस आईपीओ में सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए ही पैसे लगाने चाहिए। लंबे समय तक निवेश के लिए निवेशकों को एए और एएए रेटिंग वाले एनबीएफसी में पैसे लगाने चाहिए। एसबीएफसी फाइनेंस की A+ लॉन्ग टर्म रेटिंग है।
कॉम्पटीटर की बात करें तो फाइव स्टार बिजनेस फाइनेंस, वेरिटास फाइनेंस, आईआईएफएल फाइनेंस और फेडबैंक फाइनेंशियल सर्विसेज सिक्योर्ड एमएसएमई लोन सेग्मेंट में हैं। मुथूट फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस और श्रीराम सिटी यूनियन फाइनेंस गोल्ड गिरवी रखकर कर्ज देते हैं। इन सबकी तुलना में एसबीएफसी का रिटर्न रेश्यो सबसे कम है। एक और चिंता ये है कि इसका एट्रीशन रेट यानी कंपनी छोड़कर जाने वालों की संख्या काफी अधिक करीब 60 फीसदी। जिग्नेश का कहना है कि लोन बांटते समय जो एंप्लॉयी इसमें ग्राहक की मदद करता है, उसे ग्राहक के रिस्क प्रोफाइल के बारे में अच्छे से पता होता है तो अगर वह कंपनी छोड़ता है तो लोन रिकवरी में दिक्कत आ सकती है। जिग्नेश के मुताबिक नई कंपनी के लिए इतना हाई एट्रीशन रेट अच्छा नहीं है।
इसके अलावा एक और फैक्टर इसके पक्ष में नहीं है, वह है प्रमोटर ग्रुप। इसके प्रमोटर एसबीएफसी होल्डिंग्स, आर्पवुड कैपिटल और क्लेरमोंट कॉरपोरेशन हैं और ये सभी प्राइवेट इक्विटी फर्म हैं। फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों के मामले में प्राइवेट इक्विटी फर्म को भरोसेमेंद नहीं माना जाता है क्योंकि वे बाहर निकलने की फिराक में रहते हैं। उदाहरण के लिए आर्पवुड कैपिटल इस आईपीओ के जरिए 350 फीसदी मुनाफे पर अपनी कुछ हिस्सेदारी बेच रही है।
तो फिर SBFC Finance IPO में पॉजिटिव क्या है?
एसबीएफसी फाइनेंस सिक्योर्ड एमएसएमई लोन और गोल्ड गिरवी रखकर लोन बांटता है। इसने ज्यादातर एंटरप्रेन्योर्स और छोटे कारोबारियों को लोन बांटा हुआ है। एमएसएमई को लोन बांटने वाली एनबीएफसी की बात करें तो यह सबसे अधिक AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) वाले एनबीएफसी में शुमार है। वित्त वर्ष 2019-23 के बीच इसका एयूएम 44 फीसदी की सीएजीआर से बढ़ा है। देश में करीब 7 करोड़ एमएसएमई हैं जिसमें से सिर्फ 1.69 करोड़ ही सरकार के उद्यम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं यानी कि बड़ी संख्या में ऐसे एमएसएमई हैं जिनका एक्सेस ऑर्गेनाइज्ड फाइनेंस तक नहीं है। निवेशक के तौर पर लिस्टिंग मुनाफा कमाने के लिए यह उत्साहित करने वाला प्वाइंट है। इसके अलावा बैंकिंग और एनबीएफसी शेयरों में इस समय तेजी का रुझान है, यह भी पॉजिटिव माहौल तैयार कर रहा है।
एसबीएफसी फाइनेंस ने 2019 में आईसीआईसीआई बैंक के साथ को-ओरिजिनेशन एग्रीमेंट किया था। को-लेंडिंग एक प्रकार का अरेंजमेंट हैं जिसमें एक एंटिटी लोन ऑर्गेनाइज करती है लेकिन रिस्क दो एंटिटी साझा करती हैं। आसान शब्दों में समझें तो इस अरेंजमेंट के तहत बैंक और एनबीएफसी 80:20 के रेश्यो में रिस्क साझा करते हैं। हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि यह एग्रीमेंट खत्म होने पर एमएसएमई लोन एयूएम से 15.6 फीसदी हिस्सा सीधे कट जाएगा।
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