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Lok Sabha Elections 2024: वरुण या मेनका गांधी पर भरोसा जताएगी BJP? बांसुरी नगरी पीलीभीत में कौन छेड़ेगा जीत का सुर

Lok Sabha Elections 2024: पीलीभीत में गली नुक्कड़ और चाय की दुकानों में यही चर्चा है और अगर बीजेपी ने किसी दूसरे प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा, तो परिणाम क्या होंगे। वास्तव में पीलीभीत मेनका और वरुण के लिए उतनी ही मजबूत सीट है, जितनी सोनिया गांधी परिवार के लिए रायबरेली। पिछले चुनाव में भी वरुण गांधी पीलीभीत से भारी मतों से जीते थे

Brijesh Shuklaअपडेटेड Mar 06, 2024 पर 6:15 AM
Lok Sabha Elections 2024: वरुण या मेनका गांधी पर भरोसा जताएगी BJP? बांसुरी नगरी पीलीभीत में कौन छेड़ेगा जीत का सुर
Lok Sabha Elections 2024: 2009 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी ने पीलीभीत लोकसभा सीट को वरुण गांधी के लिए छोड़ दिया

Lok Sabha Elections 2024: बांसुरी नगरी पीलीभीत (Pilibhit), गांधी नेहरू परिवार की मेनका गांधी (Maneka Gandhi) और उनके बेटे वरुण गांधी का मजबूत किला है, लेकिन इस बार यह चर्चा आम है कि क्या बीजेपी वरुण गांधी (Varun Gandhi) का टिकट काट सकती है। अगर हां, तो उनकी जगह चुनावी मैदान में कौन उतरेगा? देश में जितनी बांसुरी बनती हैं, उसकी 95 प्रतिशत पीलीभीत में ही बनाई जाती हैं। हिमालय से सटा यह जिला भी बहुत खूबसूरत है और वन से आच्छादित भी। शारदा और घाघरा नदी से घिरा, लगभग 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला पीलीभीत टाइगर रिजर्व हिमालय के तलहटी में फैला है। यहां 125 प्रजाति के जंतुओं, 550 प्रजाति के पक्षियों और 2100 प्रजाति के फूलों की खुबसूरती है, जो देखते ही बनती है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लगभग तीन दर्जन से ज्यादा टाइगर हैं। भगवान शिव और माता पार्वती का 450 साल पुराना प्रसिद्ध मंदिर भी देवहा और खकरा नदी के तट पर है। पूरनपुर में कभी राजा वेणु का महल हुआ करता था, जो अब खंडहर हो चुका है। छठीं पाद शाही गुरुद्वारा भी इसी पीलीभीत में है, जो 400 साल पुराना है। नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारा जाते समय गुरु गोविंद सिंह जी ने यहां पर विश्राम किया था। उन्होंने सिख धर्म के छठे गुरु श्री हरगोविंद सिंह जी के स्मृति में इस गुरुद्वारे को स्थापित किया था। हजरत शाह मोहम्मद शेर मियां की दरगाह भी यहीं पर हैं।

250 साल पहले बनाई गई जामा मस्जिद भी यहां पर है। पंजाब से आये किसानों ने इस क्षेत्र की तमाम ऊबड़ खाबड़ बंजर भूमि को उपजाऊ बना दिया। यहां पर बड़े-बड़े फार्म हाउस हैं और यही कारण है कि पंजाब के सिखों की राजनीति का यहां पर व्यापक असर रहा और मेनका गांधी के चुनाव लड़ने का यह भी एक कारण रहा।

1989 में पहली बार जीतीं मेनका गांधी

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