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भारतीय बैंकों और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के शेयरों में शुक्रवार 27 जनवरी को तेज गिरावट देखी गई। इन शेयरों में यह गिरावट एक अमेरिकी फाइनेंशियल रिसर्च फर्म की ओर से अडानी ग्रुप पर रिपोर्ट आने के बाद आई। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बैंकों और एलआईसी का अडानी ग्रुप में काफी एक्सपोजर है, जिसे लेकर चिंताएं उठी हैं। निफ्टी बैंक (Nifty Bank) इंडेक्स में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और यह 3.13% फिसलकर बंद हुआ। पिछले दो दिनों में यह 5.20 फीसदी लुढ़का है। बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर आज 7.48% गिरकर बंद हुआ। वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का शेयर 4.69% नीचे आ गया।
ब्लूमबर्ग ने WealthMills Securities की चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट क्रातिं बथिनी के हवाले से बताया, "बाजार में नकारात्मक सेंटीमेंट हावी हो गया है, जो बैंकिंग शेयरों पर अपना असर दिखा रहा है।" उन्होंने कहा, "इसमें से कुछ अडानी ग्रुप को दिए अच्छे-खासे कर्ज के चलते दबाव में हैं।" हालांकि इसके अलावा हाल के महीनों में रैली के बाद मुनाफावसूली का दौर भी है।
भारतीय बैंकों ने हाल ही में दिसंबर तिमाही के शानदार नतीजे जारी किए हैं। क्रेडिट डिमांड में उछाल के चलते उनके मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। इससे बैंकिंग सेक्टर को लेकर उत्साह बढ़ा था लेकिन इस उत्साह पर तब पानी फिर गया, जब पिछले बुधवार को अमेरिकी फाइनेंशियल रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग (Hindenburg Research) ने उद्योगपति गौतम अडानी की अगुआई वाली कॉरपोरेट साम्राज्य पर निशाना साधते हुए अपनी रिपोर्ट जारी की।
ब्रोकरेज फर्म CLSA का कहना है कि अडानी ग्रुप में भारतीय बैंकों का एक्सपोजर मामूली है। ब्रोकरेज के मुताबिक, भारतीय बैंकिंग सिस्टम का अडानी ग्रुप में कुल एक्सपोजर उनके सिस्टम्स लोन का 0.55% है। वहीं अडानी ग्रुप की कुल उधारी में बैंक का कर्ज 40 फीसदी से भी कम है।
ब्लूमबर्ग ने एनालिस्ट ने कहा कि आदर्श परसरामपुरिया के हवाले से बताया कि प्राइवेट बैंकों की तुलना में सरकारी बैंकों का एक्सपोजर अजानी ग्रुप में अधिक है। उन्होंने एक नोट में बताया, "सरकारी बैंकों के लिए जोखिम अधिक है क्योंकि उनका एक्सपोजर कुल सिस्टम लोन का 0.6% और वित्त वर्ष 2024 की नेट वर्थ का 5% है।"
ब्लूमबर्ग इंटेलीजेंस के स्ट्रैटजिस्ट नितिन चंदुका ने कहा कि आज बैंकिंग शेयरों में दिखी बिकवाली के पीछे एक कारण विदेशी निवेशकों की ओर से पैसा खींचना भी है। उन्होंने कहा, "सरकारी बैंकों का खासतौर से अडानी ग्रुप में एक्सपोजर अधिक है और इसका असर बाकी सेक्टर पर भी दिखने को मिल सकता है।"
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