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BSE MidCap और SmallCap सूचकांक मुनाफावसूली के दबाव में 3% टूटे, जानिए एनालिस्ट्स इनवेस्टर्स को क्या सलाह दे रहे

BSE Midcap और Smallcap सूचकांकों में इस साल अप्रैल से अब तक 45 फीसदी तक की तेजी आई है। इस साल ये 28 फीसदी चढ़ चुके हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने हाल में इनवेस्टर्स को मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी को लेकर सतर्क किया था। इसकी वजह यह है कि मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Sep 12, 2023 पर 12:49 PM
BSE MidCap और SmallCap सूचकांक मुनाफावसूली के दबाव में 3% टूटे, जानिए एनालिस्ट्स इनवेस्टर्स को क्या सलाह दे रहे
NIFTY MICRO CAP 250 का पीई रेशियो 33 है, जबकि NIFTY50 का पीई रेशियो 22 है। NIFTY 500 का पीई रेशिय 25 है। इससे पता चलता है कि ज्यादातर माइक्रोकैप स्टॉक्स का रिस्क-रिवार्ड रेशियो अच्छा नहीं रह गया है।

BSE Midcap और Smallcap सूचकांकों पर मार्केट में तेजी का असर नहीं दिखा। दोनों ही सूचकांक करीब 3 फीसदी तक टूट गए। इसकी वजह मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में मुनाफावसूली लगती है। 10:30 बजे बीएसई मिडकैप इंडेक्स 2.8 फीसदी गिर चुका था, जबकि बीएसई स्मॉलकैप में 3.1 फीसदी गिरावट आई थी। दोनों ही सूचकांकों में इस साल अप्रैल से अब तक 45 फीसदी तक की तेजी आई है। इस साल ये 28 फीसदी चढ़ चुके हैं।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज निवेशकों को सतर्क कर चुका है

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने हाल में इनवेस्टर्स को मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी को लेकर सतर्क किया था। उसने मिडकैप पोर्टफोलियो फिलहाल नहीं बनाने की सलाह दी थी, क्योंकि इस सेक्टर में 12 महीने में अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्टॉक्स की संख्या ज्यादा नहीं दिख रही है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले कुछ समय से इन शेयरों में जारी तेजी की वजह से इनकी वैल्यएशंस बहुत बढ़ गई हैं। इस कैटेगरी की कुछ कंपनियों की सेहत खराब हुई है।

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