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मार्केट कैप के लिहाज से HDFC Bank के बाद दूसरा सबसे बड़ा वित्तीय फर्म बना ICICI Bank

आज की रिकॉर्ड तेजी में ICICI Bank ने मार्केट कैप के लिहाज से HDFC को पछाड़ दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 04, 2021 पर 8:09 AM
मार्केट कैप के लिहाज से HDFC Bank के बाद दूसरा सबसे बड़ा वित्तीय फर्म बना ICICI Bank

भारतीय इक्विटी बाजार में मजबूत बढ़त ने 3 अगस्त को कुछ दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (market-capitalisation (m-cap) को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। बीएसई के डेटा के अनुसार 21 शेयरों का m-cap अब 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि 12 शेयरों का m-cap 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं 7 शेयर ऐसे हैं जिसमें प्रत्येक का m-cap 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

मार्केट कैप (m-cap) के लिहाज से टॉप शेयरों में अच्छी रस्साकशी हुई। आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने m-cap के मामले में एचडीएफसी (HDFC) को पछाड़ते हुए एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के बाद m-cap के लिहाज से दूसरे सबसे बड़े वित्तीय फर्म के स्थान को हासिल करने का दावा किया।

बीएसई के आंकड़ों के अनुसार RIL 13.23 लाख करोड़ रुपये के साथ मार्केट कैप के लिहाज से टॉप स्टॉक है। इसके बाद TCS (12.15 लाख करोड़ रुपये),  HDFC Bank (7.94 लाख करोड़ रुपये),  Infosys (7.04 लाख करोड़ रुपये), HUL (5.62 लाख करोड़ रुपये), ICICI Bank (4.78 लाख करोड़ रुपये) और HDFC (4.61 लाख करोड़ रुपये) हैं।

बीएसई में लिस्टेड फर्मों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के 237.7 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 240 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिससे निवेशकों का पैसा भी एक ही दिन में 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया।

सेंसेक्स के 30 शेयरों में केवल तीन स्टॉक Bajaj Auto (0.33 प्रतिशत नीचे), Tata Steel (0.20 प्रतिशत नीचे) और NTPC (0.17 प्रतिशत नीचे) रहे जो कि 3 अगस्त को लाल निशान में बंद हुए।

अंत में सेंसेक्स 873 अंक यानी 1.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53,823.36 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 246 अंक यानी 1.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,130.75 पर बंद हुआ। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.19 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,374 पर बंद हुआ जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 27,134 पर बंद हुआ।

बड़े पैमाने पर तिमाही नतीजों के अच्छे रहने और मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ें  (macroeconomic numbers) में सुधार से बाजार के सेंटीमेंट को मजबूती मिली। विश्लेषकों का अब भी मानना ​​है कि इस बाजार में आर्थिक विकास की गति के साथ bottom-up के मौके हैं।

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