Daily Voice : भारत में इक्विटी बाजार भारी वोलैटिलिटी के बावजूद प्रतिकूल ग्लोबल परिस्थितियों का सामना करने की ताकत रखता है। भारतीय बाजार की मजबूती में कॉर्पोरेट आय में मजबूत बढ़त, निजी कंपनियों के विस्तार योजनओं में होने वाले खर्च में हो रही बढ़त, उपभोक्ता के खर्च में बढ़त और सहायक और अनुकूल सरकारी नीतियों का अहम योगदान है। ऐसे में अगला वित्त वर्ष इक्विटी बाजार के लिए अच्छा रहने की उम्मीद है। ये बातें मिराए एसेट्स इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) की फंड मैनेजर भारती सावंत ने मनीकंट्रोल को दिए एक साक्षात्कार में कही हैं। यहां हम आपके लिए इस साक्षात्कार का संपादित अंश दे रहे हैं।
वर्तमान सरकार की सत्ता में वापसी की उम्मीद
आगामी लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी सरकार की सत्ता में वापसी की उम्मीद के साथ भारती सावंत को लगता है कि वित्त वर्ष 2025 का बजट राजकोषीय अनुशासन के साथ विकासोन्मुख बजट रहेगा। दो स्कीमों में 1,500 करोड़ रुपये के फंड को मैनेज करने वाली भारती का मानना है कि आगे हमें फाइनेंशियल और खपत से जुड़े शेयरों में तेजी देखने को मिलेगी। देश में आर्थिक विकास की गति बढ़ती नजर आएगी।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि के लिए निवेश की सलाह
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को हुई इस बातचीत में भारती ने आगे कहा कि इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में वित्तीय आजादी दे सकते हैं। किसी भी प्रकार का वित्तीय निवेश वित्तीय आजादी की उम्मीद पर ही टिका होता है। ये तनाव मुक्त जीवन जीने में मदद करता है। ज्यादातर महिलाएं या तो सोने में निवेश को सबसे अच्छा मानती हैं या बचत के साधन के रूप में एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) में पैसे डालती हैं। कुछ महिलाएं इक्विटी में पैसे लगाना चाहती हैं लेकिन यह नहीं जानती कि किस स्टॉक में निवेश करना है और कितने समय के लिए। उन सभी महिलाओं के लिए भारती की सलाह है कि वे म्यूचुअल फंड में निवेश करें जो महिलाओं के स्टॉक चुनने की परेशानी से मुक्ति देता है।
बजट में राजकोषीय अनुशासन और विकास पर होगा फोकस
क्या आपको लगता है कि जून-जुलाई में केंद्रीय बजट और इस साल के अंत में ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत बाजार के लिए अगले बड़े ट्रिगर होंगे? इस सवाल के जवाब में भारती ने कहा कि वर्तमान सरकार के सत्ता में वापसी की उम्मीद को देखते हुए लगता है कि वित्त वर्ष 2025 के बजट में राजकोषीय अनुशासन के साथ विकास पर फोकस होगा। ब्याज दरों में कटौती की बात करें तो इसमें कटौती का समय ज्यादा अहम जो बाजार को पुश कर सकता है। आगे भारतीय बाजार की मजबूती में कॉर्पोरेट आय में मजबूत बढ़त, निजी कंपनियों के विस्तार योजनओं में होने वाले खर्च में हो रही बढ़त, उपभोक्ता के खर्च में बढ़त और सहायक और अनुकूल सरकारी नीतियों का अहम योगदान रहेगा।
फाइनेंशियल सेक्टर पर नियामक कार्रवाइयों से न घबराएं
फाइनेंशियल सर्विस इंडस्ट्री पर लगातार हो रही नियामक कार्रवाइयों पर बात करते हुए भारती ने कहा कि ऐसी नियामक कार्रवाइयों के लिए रेग्युलेटर के पास अपने कारण और डेटा होंगे। जहां तक निवेशकों की भावनाओं की बात है तो ऐसा लगता है कि वे कार्रवाई के बजाय नियामक कार्रवाई के अचानक शुरू होने से ज्यादा परेशान होते हैं। हालांकि, जब तक इन नियामक कार्रवाइयां से कारोबारी तौर तरीकों को मजबूती मिलेगी तब तक निवेशकों की भावना पर इनका सकारात्मक असर ही होगा। इनसे परेशान होने की जरूरत नहीं है।
वित्त वर्ष 2025 के लिए पसंदीदा सेक्टर और थीम
वित्त वर्ष 2025 के लिए अपने पसंदीदा सेक्टर और थीम पर बात करते हुए भारती ने कहा कि दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपनी उच्च विकास दर को देखते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था अलग ही नजर आ रही है। पसंदीदा सेक्टर्स की बात करें तो फाइनेंशियल और खपत से जुड़े शेयरे आगे अच्छा करते दिखेंगे। सरकार के 'मेक इन इंडिया' पर फोकस के कारण मैन्युफैक्चरिंग को भी अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए।
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