यू एस फेड की तरफ से मार्च 2022 के बाद से ब्याज दरों में लगातार की गई बढ़ोतरी के बाद अब भारत सहित दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कंपनियों के नतीजों पर दबाव देखने को मिल सकता है। ये बातें IIFL सिक्योरिटीज के चेयरमैन आर वेंकटरमन ने मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में कही हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में जब कंपनियों के प्रदर्शन पर दबाव रहने की संभावना हो तब प्राइमरी मार्केट में बहुत ज्यादा सरगर्मी की संभावना काफी कम होती है। सामान्य तौर पर प्राइमरी मार्केट में उस समय ज्यादा एक्शन देखने को मिलता है। जब बाजार और इकोनॉमी दोनों में मजबूती रहती है। भारत में इस समय महंगाई की स्थिति और मौद्रिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता है। ऐसे में हमें आईपीओ मार्केट में बहुत गहमा-गहमी की उम्मीद नहीं है।
