अडानी ग्रुप (Adani Group) की एंट्री से सीमेंट इंडस्ट्री के स्ट्रक्चर में बुनियादी बदलाव आया है। ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद बिल्डिंग मैटेरियल कंपनियों पर कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया। इंडिया सहित उनकी सब्सिडियरी की एक ही मांग थी-पेरेंट कंपनियां ज्यादा डिविडेंड का ऐलान करें ताकि कर्ज का उनका बोझ घट जाए। कैपिटल एलोकेशन के इस फैसले की वजह से पिछले दशक में इंडिया में मौजूद मल्टीनेशनल सीमेंट कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में कमी आई।
