फरवरी की शुरुआत में भी नहीं बदला FPI का रुख, पहले सप्ताह में बेच डाले ₹7342 करोड़ के शेयर

FPI Selling in February: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2024 में भारतीय शेयरों में सिर्फ 427 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। इससे पहले 2023 में उन्होंने भारतीय बाजार में 1.71 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। 2022 में FPI ने 1.21 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी

अपडेटेड Feb 09, 2025 पर 1:59 PM
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जनवरी में FPI ने भारतीय बाजारों से 78,027 करोड़ रुपये निकाले थे।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारतीय शेयर बाजारों में सेलिंग जारी है। अमेरिका की ओर से कनाडा, मेक्सिको और चीन पर नया टैरिफ लगाने की वजह से वैश्विक व्यापार को लेकर तनाव बना है। इसके चलते विदेशी निवेशकों ने फरवरी महीने के पहले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजारों से 7,300 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। इससे पहले जनवरी में FPI ने भारतीय बाजारों से 78,027 करोड़ रुपये निकाले थे। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 में FPI ने भारतीय बाजारों में 15,446 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आगे चलकर बाजार का सेंटिमेंट ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक डेवलपमेंट्स, घरेलू नीतिगत उपायों और करेंसी के उतार-चढ़ाव से तय होगा। आंकड़ों के अनुसार, FPI ने इस महीने 7 फरवरी तक भारतीय शेयरों से 7,342 करोड़ रुपये निकाले हैं।

जोखिम उठाने से बच रहे हैं FPI


पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि FPI की सेलिंग का एक प्रमुख कारण ग्लोबल ट्रेड को लेकर उपजा तनाव है। अमेरिका ने कनाडा, मेक्सिको और चीन पर नया टैरिफ लगाया है, जिससे ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इस अनिश्चितता की वजह से वैश्विक निवेशकों ने जोखिम न उठाने का विकल्प चुना है। इसके चलते वे भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं।

श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय रुपया भी कमजोर होकर पहली बार 87 प्रति डॉलर से नीचे आ गया है। कमजोर रुपये से विदेशी निवेशकों का रिटर्न घटता है और उनके लिए भारतीय एसेट्स कम आकर्षक रह जाते हैं।

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डॉलर इंडेक्स की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड पर हाई यील्ड भी है वजह

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार के मुताबिक, ‘‘डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड पर हाई यील्ड FPI को बिकवाली के लिए मजबूर कर रहे हैं। आगे चलकर FPI की बिकवाली में कमी आने की उम्मीद है क्योंकि डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में अब नरमी का रुख दिख रहा है।’’

उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत शॉर्ट टर्म में सकारात्मक प्रभाव डालेगी। हालांकि बाजार का मीडियम से लॉन्ग टर्म रुख, आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की आमदनी में सुधार पर निर्भर करेगा। साथ ही बजट की घोषणाओं और आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती के बाद भारतीय बाजार में सेंटिमेंट धीरे-धीरे सुधरेगा।

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डेट मार्केट में ​की खरीद

फरवरी महीने में अब तक FPI डेट या बॉन्ड बाजार में शुद्ध बायर रहे हैं। पहले सप्ताह में उन्होंने बॉन्ड में जनरल लिमिट के तहत 1,215 करोड़ रुपये और वॉलंटरी रिटेंशन रूट से 277 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

FPI ने 2024 में भारतीय शेयरों में सिर्फ 427 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। इससे पहले 2023 में उन्होंने भारतीय बाजार में 1.71 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। 2022 में FPI ने 1.21 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी।

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