Gujarat New Policy: गुजरात सरकार ने राज्य की पीएसयू कंपनियों के लिए डिविडेंड और बोनस शेयर बांटने के लिए नई नीति पेश की है। नई नीति के तहत जो मार्केट में लिस्ट हैं और जो नहीं है, उन सभी कंपनियों के लिए तय कर दिया गया है कि उन्हें मिनिमम कितना डिविडेंड बांटना ही है। इसके अलावा बोनस शेयरों और शेयर तोड़ने के लिए भी प्रावधान तय कर दिया गया है। शेयर बायबैक के लिए भी गुजरात सरकार ने प्रावधान तय कर दिए हैं। लिस्टेड कंपनियों की बात करें इसकी सात पीएसयू मुनाफे में हैं। सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि राज्य की सरकारी कंपनियों का वैल्यूएशन बढ़ सके। राज्य में 63 स्टेट पीएसयू हैं जिसमें से सात मार्केट में लिस्ट हैं।
डिविडेंड को लेकर क्या हैं नियम
गुजरात सरकार ने टैक्स काटने के बाद जो मुनाफा बचता है यानी नेट प्रॉफिट, उसका कम से कम 30 फीसदी या इसके कुल नेटवर्थ का 5 फीसदी, इसमें से जो भी अधिक है, उतना डिविडेंड शेयरहोल्डर्स को बांटना ही होगा। हालांकि प्रावधान के तहत डिविडेंड का सिर्फ न्यूनतम और अधिकतम स्वीकार्य स्तर घोषित किया जाना चाहिए।
शेयरों के बायबैक को लेकर क्या है प्रावधान
गुजरात सरकार ने राज्य की सरकारी कंपनियों के लिए नेटवर्थ और नगदी की न्यूनतम सीमा तय कर दी है जिसके ऊपर इन्हें शेयरों का बायबैक करना होगा। नए नियमों के मुताबिक अब राज्य सरकार की जिन कंपनियों की नेटवर्थ 2 हजार करोड़ रुपये या इससे ज्यादा है और कम से कम 1 हजार करोड़ रुपये का कैश और बैंक बैलेंस हो तो उन्होंने अपने शेयरों को वापस खरीदने के लिए बायबैक का फैसला लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
बोनस और स्टॉक स्प्लिट के लिए ये प्रावधान तय
गुजरात की जिन स्टेट पीएसयू का रिजर्व और सरप्लस उनके पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल से 10 गुना के बराबर या इससे अधिक हो, उन्हें अपने शेयरहोल्डर्स को बोनस शेयर देना होगा। वहीं सरकार ने स्टॉक स्प्लिट को लेकर यह प्रावधान कर दिया है कि अगर किसी स्टेट पीएसयू के शेयरों का मार्केट प्राइस या बुक वैल्यू इसकी वैल्यू के 50 गुना से अधिक हो जाए तो इसे तोड़ना यानी स्टॉक स्प्लिट करना होगा। हालांकि शेयरों की फेस वैल्यू एक रुपये से अधिक होने पर ही स्टॉक स्प्लिट का यह प्रावधान लागू होगा।