Paytm की बढ़ने वाली है मुसीबत, Macquarie 400 करोड़ रुपये के किस झटके की कर रही है बात?

मैक्वायरी ने कहा, पेटीएम अगर मर्चेंट्स को दी जाने वाली अपनी सभी साउंड डिवाइसेज का रेंटल जीरो कर देती है तो कंपनी के रेवेन्यू को 400 करोड़ रुपये और एबिटडा को 500 करोड़ रुपये का झटका लग सकता है

अपडेटेड Aug 04, 2022 पर 5:04 PM
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Macquarie ने 450 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ पेटीएम के स्टॉक के लिए अंडरपरफॉर्म की रेटिंग बरकरार रखी है

Paytm revenue : डिजिटल पेमेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी पेटीएम अगर मर्चेंट्स को दी जाने वाली अपनी सभी साउंड डिवाइसेज का रेंटल जीरो कर देती है तो कंपनी के रेवेन्यू को 400 करोड़ रुपये और एबिटडा को 500 करोड़ रुपये का झटका लग सकता है। मैक्वायरी ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है।

Macquarie ने 450 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ पेटीएम के स्टॉक के लिए अंडरपरफॉर्म की रेटिंग बरकरार रखी है।

किस मोर्चे पर टक्कर दे रही फोनपे


मनीकंट्रोल ने एक दिन पहले ही खबर दी थी कि पेटीएम के साउंडबॉक्स को प्रतिस्पर्धी कंपनी फोनपे से तगड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। इसके एक दिन बाद मैक्वायरी ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। साउंडबॉक्स दुकानदारों से मिलने वाले पेमेंट की घोषणा करता है।

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साउंडबॉक्स पर आता है कितना खर्च

मैक्वायरी के मुताबिक, इससे प्रभावित धनराशि पिछले वित्त वर्ष यानी 2022 के रेवेन्यू की 8 फीसदी और एबिटडा के 20 फीसदी के बराबर है। Macquarie ने कहा, हमारी जांच के आधार पर फिनटेक कंपनियां प्रति डिवाइस 25 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से रखरखाव की कॉस्ट का बोझ उठाती हैं, जो सिम कार्ड की कॉस्ट है। इसके अलावा का कुछ बैकएंड कॉस्ट भी होगी। इसलिए कुल कॉस्ट लगभग 100 करोड़ रुपये होगी।

फोनपे ने जुलाई में लॉन्च की डिवाइस

मनीकंट्रोल ने सबसे पहली खबर दी थी कि यूपीआई लीडर फोनपे ने 49 रुपये के मंथली रेंटल के साथ जुलाई में अपनी डिवाइस लॉन्च की है और इसकी अपफ्रंट कॉस्ट 1 सिर्फ 1 रुपये है। अपने लॉन्च के बाद फोनपे 1,00,00 डिवाइस लगा चुकी है।

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पेटीएम ने 2020 में सैंडबॉक्स के लॉन्च के बाद अभी तक 30 लाख डिवाइस लगा चुकी है। वर्तमान में कंपनी अपने विभिन्न मर्चेंट्स से जीरो से 125 रुपये तक चार्ज वसूलती है। ये स्पीकर कंपनियों के लिए रेवेन्यू के अहम सोर्स हैं, जो यूपीआई ऐप्स संचालित करती हैं। ऐप्स फिनटेक्स के लिए कोई रेवेन्यू जेनरेट नहीं करती हैं, क्योंकि मर्चेंट्स को यूपीआई पेमेंट्स स्वीकार करने के लिए उन्हें कोई पेमेंट नहीं करना होता है।

मैक्वायरी ने कहा कि फोनपे लिस्टेड नहीं है, इसलिए मार्केट शेयर के लिए घाटा उठा सकती है। हालांकि, लिस्टेड होने के कारण पेटीएम के लिए प्रॉफिट दिखाना मजबूरी है।

 

 

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