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Indian Bond Market: SEBI का एलर्ट, कॉरपोरेट बॉन्ड नहीं हैं रिस्क-फ्री, इन प्रस्तावों पर हो रहा काम

Indian Bond Market: सेबी का कहना है कि कॉरपोरेट बॉन्ड्स टैक्स-फ्री नहीं हैं। हालांकि भारतीय बॉन्ड मार्केट तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसे और आगे बढ़ाने के लिए और खुदरा निवेशकों के लिए इसे आकर्षक बनाने के लिए सेबी खास योजनाएं बना रहा है। जानिए बॉन्ड मार्केट की अभी क्या स्थिति है और सेबी इसे बढ़ाने के लिए क्या काम कर रहा है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 26, 2026 पर 1:18 PM
Indian Bond Market: SEBI का एलर्ट, कॉरपोरेट बॉन्ड नहीं हैं रिस्क-फ्री, इन प्रस्तावों पर हो रहा काम
Indian Bond Market: आउटस्टैंडिंग कॉरपोरेट बॉन्ड्स ₹17.5 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹59 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में डेट जारी कर ₹9.1 ट्रिलियन यानी ₹9.1 लाख करोड़ जुटाए गए जो इक्विटी मार्केट के जरिए जुटाई गए पैसों से लगभग दोगुना है।

Indian Bond Market: मार्केट रेगुलेटर (SEBI) देश के डेट मार्केट को मजबूत करने के लिए कॉरपोरेट ब़ॉन्ड्स के टोकनाइजेशन को लेकर एक पायलट फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार कर रहा है। हालांकि सेबी ने निवेशकों को इस बात को लेकर भी सतर्क किया है कि कॉरपोरेट बॉन्ड्स पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं होते हैं। सेबी के प्रमुख तुहिन कांता पांडेय ने ये बातें केयरएज रेटिंग्स के डेट मार्केट समिट में कही। उन्होंने कहा कि सेबी मार्केट में लिक्विडिटी सुधारने, निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने और बॉन्ड मार्केट में निवेशकों का भरोसा मजबूत करने के लिए मार्केट के नए ढांचे और नियामकीय सुधारों को लेकर काम कर रहा है।

तेजी से बढ़ा है कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट

पिछले कुछ वर्षों में भारत में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार तेजी से बढ़ा है। आउटस्टैंडिंग कॉरपोरेट बॉन्ड्स ₹17.5 लाख करोड़ से बढ़कर करीब ₹59 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में डेट जारी कर ₹9.1 ट्रिलियन यानी ₹9.1 लाख करोड़ जुटाए गए जो इक्विटी मार्केट के जरिए जुटाई गए पैसों से लगभग दोगुना है। इसके बावजूद सेबी का मानना है कि मार्केट में अब भी कई कमियों को दूर करना बाकी है।

सेबी प्रमुख का कहना है कि मार्केट में अभी भी इश्यूर्स, रेटिंग्स और सेक्टर्स सीमित हैं जिससे निवेशकों के लिए विकल्प सीमित हो जाते हैं। उन्होंने जिक्र किया कि बॉन्ड्स की ट्रेडिंग लगभग न के बराबर है यानी लिक्विडिटी लगभग बहुत कम है जिससे निकासी मुश्किल हो जाती है और नए निवेशक पैसे लगाने से हिचकिचाते हैं। इसमें भी खुदरा निवेशकों की बात करें तो बॉन्ड मार्केट में उनकी भागीदारी 1% से भी कम है।

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