How to invest in record high Stock Market: मार्केट नई ऊंचाईयों को छू रहा है। कोरोना महामारी के दौरान मार्केट अर्श से फर्श पर लोट गया था लेकिन पिछले तीन साल में इसने खुदरा निवेशकों के दम पर फिर नई ऊंचाईयों का सफर तय किया। खुदरा निवेशकों मे मार्केट को कैसे सपोर्ट किया है, इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जनवरी 2022 से मार्च 2023 के बीच जब विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड मात्रा में निकासी की थी तो भी मार्केट ढह नहीं गया। खुदरा निवेशक मार्केट को लेकर कितना क्रेजी हैं, इस ऐसे समझें कि वित्त वर्ष 2019 के आखिरी मं 3.5 करोड़ डीमैट खाते थे जो वित्त वर्ष 2023 तक आकर 11.5 करोड़ पर पहुंच गए। इसके चलते कोरोना के बाद दिसंबर 2021 तक मार्केट चढ़ता ही गया और कोरोना के दौरान के निचले स्तर से यह दोगुनी ऊंचाई पर पहुंच गया।
हालांकि इसके बाद अगले 15 महीने जनवरी 2022 से मार्च 2023 तक इसमें कुछ गिरावट दिखी लेकिन नए निवेशकों का भरोसा बना रहा। इसका फायदा भी उन्हें मिला और अगले तीन महीने अप्रैल 2023 से जून 2023 तक इसमें शानदार तेजी दिखी। अब आगे निवेश को लेकर क्या करें, इसे लेकर फिनवाइज पर्सनल फाइनेंस सॉल्यूशन्स के को-फाउंडर गिरीश गणराज ने तीन प्वाइंट्स सुझाए हैं।
लॉन्ग टर्म के हिसाब से लगाएं पैसे
पिछले 40 वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि स्टॉक मार्केट में हर साल 10 फीसदी सुधार होता है, और लगभग हर दो साल में 20 फीसदी सुधार होता है। ऐसे में अगर आपको लगता है कि अगले कुछ महीनों में मार्केट में अच्छी तेजी दिख सकती है तो यह सोचकर पैसे न लगाएं। बाजार की रिकॉर्ड हाई के बीच नए निवेशक मध्यम से लंबे समय यानी 3 से 5 साल तक के लिए पैसे लगाएं तो बेहतर है और इस बीच अगर कुछ झटके लगें तो आश्चर्य न करें।
बाजार की मौजूदा तेजी के बीच इसमें पैसे लगाने की जल्दबाजी में रिसर्च करना न छोड़ें। अगर आप केवल इस उम्मीद में कोई शेयर खरीदते हैं कि बाद में कोई और इसे आपसे अधिक कीमत पर खरीदेगा तो यह बड़ी गलती साबित हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि किसी भी शेयर या फंड में पैसे लगाने से पहले अपने इनवेस्टमेंट थीसिस और फंडामेंटल रीजन्स की कसौटी पर इसे जरूर परखें।
लालच न करें, अपने रिस्क क्षमता को पहचानें
बाजार की मौजूदा तेजी के बीच यह धारणा बनी है कि स्मॉलकैप में निवेश करने का यह अच्छा समय है। यह सच हो सकता है लेकिन सावधान रहने की भी जरूरत है क्योंकि स्मॉलकैप में उतार-चढ़ाव तेज होता है जिसे संभालना सभी निवेशक के बस में नहीं है। इसी प्रकार स्वाभाविक रूप से किसी भी समय सेक्टोरल कॉल लेने में बहुत अधिक रिस्क है। इसे ऐसे समझें कि अभी दो विरोधी तर्क एक साथ चल रहे हैं। एक तो यह कि कंजम्प्शन तेजी से बढ़ रहा है तो इस सेक्टर में निवेश का मौका है।
वहीं दूसरी तरफ वैश्विक मंदी की भी आशंका है जिससे खपत गिर सकती है। अब इन दोनों में कौन सी बात अगली कुछ तिमाहियों में काम करेगी, इसे लेकर अभी कुछ कहना संभव नहीं है। कोशिश करें कि अपने पोर्टफोलियो को डाईवर्सिफाई बनाए रखें और अपने लॉन्ग टर्म जरूरतों के आड़े में शॉर्ट टर्म के लालच को न आने दें।