Metal Stocks: मेटल कंपनियों के शेयरों में आज लगातार पांचवे दिन खरीदारी का जोरदार रुझान दिखा। वहीं 15 दिग्गज मेटल कंपनियों के शेयरों को ट्रैक करने वाला निफ्टी इंडेक्स निफ्टी मेटल पिछले 10 कारोबारी दिनों में 9 दिन ग्रीन जोन में रहा। आज की बात करें तो निफ्टी मेटल फिलहाल 0.75% की बढ़त के साथ 10,748.95 पर है। स्टॉकवाइज बात करें तो निफ्टी मेटल पर सबसे अधिक तेजी एनएमडीसी (NMDC) में आई जो करीब 4% ऊपर चढ़ा तो लॉयड्स मेटल (Lloyds Metals) में भी करीब 3% की तेजी आई। हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) और सेल (SAIL) के शेयर भी 2-2% से अधिक उछल पड़े।
INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी के मुताबिक कुछ कारोबारी दिनों में हिंदुस्तान कॉपर, हिंदाल्को, वेदांता और सेल जैसे अहम स्टॉक्स नए हाई पर पहुंचे हैं। फेरस और नॉन-फेरस दोनों सेगमेंट में धड़ाधड़ खरीदारी हुई और हर्षल का मानना है कि कारोबारी वॉल्यूम में उछाल कमजोर नवंबर के बाद संस्थागत निवेशकों की वापसी का संकेत देता है।
Metal Stocks: इन वजहों से चमक उठे मेटल स्टॉक्स
एक्सिस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (मेटल्स) आदित्य वेलेकर का कहना है कि मेटल शेयरों में तेज उछाल की बड़ी वजह धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी है जो अगले साल 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से जुड़ी है। आदित्य का मानना है कि अमेरिका में लेबर मार्केट में नरमी से फेड को दरें घटाने का मौका मिल सकता है, जो मेटल सेक्टर के लिए पॉजिटिव न्यूज है।
हर्षल का कहना है कि मेटल कंपनियों को चीन की नीतियों से काफी सपोर्ट मिल रहा है। चीन में बुनियादी ढांचे, पावर ग्रिड, रिन्यूएबल एनर्जी और अर्बन रीडेवलपमेंट के लिए नीतिगत सपोर्ट बढ़ने से स्टील, कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक की मांग में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी सेक्टर कमजोर बना हुआ है, लेकिन सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर और औद्योगिक गतिविधियों में में स्थिरता से मेटल्स की कीमतों को स्थिर होने में मदद मिली है।
हर्षल के मुताबिक वैश्विक ग्रोथ के एकसमान नहीं होने के बावजूद कुछ बेस मेटल्स के सीमित इंवेंटरी के चलते गिरावट का रिस्क सीमित हो गया है। वहीं आदित्य का भी कहना है कि कॉपर और एल्युमिनियम जैसे मेटल्स और बेस मेटल्स की सप्लाई सीमित है लेकिन मांग मजबूत बनी हुई है। चांदी और बेस मेटल्स की मांग को इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) और एआई के बढ़ते विस्तार से सपोर्ट मिला हुआ है।
हर्षल का कहना है कि हालिया हाई से डॉलर इंडेक्स काफी नीचे आ चुका है जिससे डॉलर के भाव में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज को सपोर्ट मिला है। रियल यील्ड में नरमी से मेटल्स की चमक बढ़ी है। वहीं सप्लाई साइड में माइनिंग की दिक्कतों, एनर्जी कॉस्ट में उछाल और पर्यावरण से जुड़े सख्त नियमों ने कैपेसिटी बढ़ाने की संभावना को सीमित कर दिया है तो दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक गाड़ियों, पावर ट्रांसमिशन और रिन्यूएबल इंफ्रा में इसकी मांग बनी हुई है।
वेल्थ1 की बिजनेस हेड चार्मी शाह का कहना है कि सोने, चांदी और तांबे में मौजूदा तेजी सिर्फ कागजी उत्साह नहीं दिखा रहा, बल्कि फिजिकल सप्लाई में आई कमी का भी संकेत है। चार्मी शाह के मुताबिक चांदी और तांबे की सप्लाई पिछले कई वर्षों से टाइट है। चांदी की बात करें तो सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के सेक्टर में मांग लगातार माइनिंग सप्लाई से अधिक रही है तो तांबा भी नई माइन में कम निवेश, लंबे समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट और अयस्कों की घटती गुणवत्ता जैसी दिक्कतों से जूझ रहा है जो अब कीमतों में भी दिखने लगी हैं। गोल्ड के मामले में बात करें तो केंद्रीय बैंक की ताबड़तोड़ खरीदारी से इसे सपोर्ट मिल रहा है।
हर्षल का मानना है कि मेटल शेयरों में तेजी बनी रह सकती है लेकिन इसमें उठा-पटक से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। Vibhavangal Anukulakara के फाउंडर और एमडी सिद्धार्थ मौर्य का कहना है कि मेटल्स पर अभी वैश्विक मांग, करेंसी में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों का असर है। ऐसे में सिद्धार्थ का मानना है कि तेजी अभी जारी रह सकती है लेकिन इसमें हल्की-फुल्की नरमी भी दिख सकती है। हर्षल का कहना है कि नियर टर्म में जब तक डॉलर कमजोर है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख नरम रहता है, मेटल स्टॉक्स को सपोर्ट बना रह सकता है लेकिन अमेरिका से किसी चौंकाने वाले आंकड़े या चीन के निर्यात से जुड़ी चिंताओं से इसे झटका दिख सकता है। उन्होंने निवेशकों को फिलहाल मौजूदा तेजी को भुनाने की कोशिश में फटाफट निवेश करने की बजाय बैलेंस शीट की मजबूती और बेहतर लागत वाले प्रोड्यूसर्स पर फोकस करने की सलाह दी है।
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