Mutual funds: म्यूचुअल फंडों ने फरवरी महीने के दौरान सरकारी कंपनियों के शेयरों से 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की भारी निकासी की। फंड मैनेजरों ने ऊंचे वैल्यूएशन और कुछ कंपनियों के तिमाही नतीजों में कमजोरी की आशंका को देखते हुए ये बिकवाली की है। इस भारी बिकवाली के चलते BSE PSU इंडेक्स अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 7 प्रतिशत नीचे गिरा गया है, जो इसने इसी 6 मार्च को छुआ था। जिन शेयरों में उनके 52-हफ्तों के उच्चतम स्तर से सबसे ज्यादा गिरावट आई है, उसमें NBCC इंडिया, मिश्र धातु निगम, RCFL, MMTC, KIOCL, SJVN और RVNL शामिल हैं। इनमें से कुछ गिरावट सिर्फ म्यूचुअल फंडों की ओर से बिकवाली के चलते आई।
म्यूचुअल फंडों हाउस के फिलहाल कुल 56 सरकारी कंपनियों के शेयर हैं। फरवरी महीने में इन्होंने इन कंपनियों के करीब 3,524 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे म्यूचुअल फंडों के पास रखी PSU कंपनियों के शेयरों की कुल वैल्यू 4.2 लाख करोड़ रुपये से घटकर 3.95 लाख करोड़ रुपये पर हो गया।
म्यूचुअल फंडों ने सबसे ज्यादा SJVN में करीब 53 प्रतिशत हिस्सेदारी घटाई। इसके बाद इरकॉन इंटरनेशनल और एनएमडीसी स्टील में उन्होंने अपनी हिस्सेदारी का क्रमश: 47 प्रतिशत और 30 प्रतिशत किया। फरवरी के अंत में, फंड हाउसों के पास SJVN के 6.25 करोड़ शेयर थे, जिसकी वैल्यू 757 करोड़ रुपये थी। जनवरी के अंत में उनके पास 1,772 करोड़ रुपये के कंपनी के करीब 13.45 करोड़ शेयर थे।
इसी तरह इरकॉन इंटरनेशनल में, म्यूचुअल फंडों ने फरवरी महीने के दौरान करीब 40 लाख शेयर बेचे। इससे कंपनी में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी घटकर 103 करोड़ रुपये के 45 लाख शेयर रह गई, जो एक महीने पहले 201 करोड़ रुपये के 85 लाख शेयर थे। बिकवाली के बाद इरकॉन के शेयर अपने 52-वीक हाई से 25 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं।
NMDC स्टील के म्यूचुअल फंडों ने फरवरी में 2.52 करोड़ शेयर बेचे। फरवरी महीने के अंत में उनके पास कंपनी के 5.92 करोड़ शेयर थे, जिसकी वैल्यू 363 करोड़ रुपये थी। जबकि जनवरी महीने के अंत में उनके पास कंपनी के 588 करोड़ रुपये के शेयर थे। फंड हाउसों ने RITES में 27.21 लाख शेयर भी बेचे, जिससे उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू 805 करोड़ रुपये से घटकर 634 करोड़ रुपये पर आ गई। इसके अलावा उन्होंने इंजीनियर्स इंडिया और NHDC के लगभग 99.65 लाख और 5.45 करोड़ शेयर बेचे।
म्यूचुअल फंडों ने फरवरी में इन कंपनियों में सबसे अधिक हिस्सेदारी घटाई-