UTI Mutual Fund में हिस्सेदारी बेचेंगे एलआईसी और 3 सरकारी बैंक, SBI कैपिटल मार्केट्स को नियुक्त किया मर्चेंट बैंकर

यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी (UTI AMC) में हिस्सेदारी बेचने के लिए तीन सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड (SBI Capital Markets Ltd) को मर्चेंट बैंकर के रूप में नियुक्त किया है। UTI AMC में हिस्सेदारी बेचने की यह प्रक्रिया अगले तीन से छह महीने में पूरी कर ली जाएगी

अपडेटेड Jun 15, 2023 पर 8:01 PM
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UTI म्यूचुअल फंड में इन चारों संस्थाओं की कुल 45.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है

यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी (UTI AMC) में हिस्सेदारी बेचने के लिए तीन सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड (SBI Capital Markets Ltd) को मर्चेंट बैंकर के रूप में नियुक्त किया है। UTI AMC में हिस्सेदारी बेचने की यह प्रक्रिया अगले तीन से छह महीने में पूरी कर ली जाएगी। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने गुरुवार 15 जून को मनीकंट्रोल यह जानकारी दी। इनमें से एक सूत्र ने बताया, “हमने SBI कैपिटल मार्केट्स को नियुक्त किया है। हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया शुरू हो गई है और हमें उम्मीद है कि यह 3-6 महीने में पूरी हो जाएगी।"

इससे पहले इकोनॉमिक टाइम्स ने एक रिपोर्ट में बताया बताया था तीन सरकारी बैंक और एलआईसी, UTI एसेट मैनेजमेंट कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहे हैं। इन सरकारी बैंकों में- पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) शामिल है। UTI म्यूचुअल फंड में इन चारों संस्थाओं की कुल 45.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

यूटीआई म्यूचुअल फंड के 31 मार्च तक के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, PNB के पास इसकी 15.22 प्रतिशत हिस्सेदारी या 1.93 करोड़ शेयर हैं। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा, SBI और एलआईसी में से प्रत्येक के पास 9.97 प्रतिशत की बराबर हिस्सेदारी है।


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इसके अन्य प्रमुख शेयरधारकों की बात करें तो, टाटा म्यूचुअल फंड के पास 3.55 प्रतिशत हिस्सेदारी, PPFAS म्यूचुअल फंड के पास 2.52 प्रतिशत और मिराए एसेट म्यूचुअल फंड के पास 2.07 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, पहले टाटा समूह इन चारों सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं से UTI AMC में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रहा था। हालांकि एक बड़े निवेशक ने इसकी जगह अपनी हिस्सेदारी को बोली की प्रक्रिया के जरिए बेचने पर जोर दिया, जिससे यह बातचीत विफल हो गई।

पंजाब नेशनल बैंक ने पिछले साल वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले दीपम डिपार्टमेंट से UTI एसेट मैनेजमेंट कंपनी में अपनी पूरी/आंशिक हिस्सेदारी बेचने के लिए मंजूरी हासिल की थी।

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