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NSE के शेयरों की आगे चलकर धीमी पड़ सकती है रफ्तार, ब्रोकिंग फर्म्स को क्यों लग रहा ऐसा

NSE Stock Price: पिछले सप्ताह एक्सचेंज ने यह भी बताया कि उसके प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 10 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है, जबकि यूनीक खातों की संख्या 19 करोड़ आंकी गई है। NSE ने 5 महीनों के अंदर 1 करोड़ निवेशक जोड़े हैं। पिछले 5 वर्षों में इनवेस्टर बेस में तीन गुना से अधिक का उछाल देखा गया है। 10 करोड़ रजिस्टर्ड निवेशकों में, निवेशकों की औसत आयु 32 वर्ष है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Aug 13, 2024 पर 7:51 AM
NSE के शेयरों की आगे चलकर धीमी पड़ सकती है रफ्तार, ब्रोकिंग फर्म्स को क्यों लग रहा ऐसा
जुलाई में NSE के शेयरों की एवरेज कीमत 4282 रुपये रही।

NSE Shares: साल 2020 से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों की वैल्यू में 3 गुना से ज्यादा उछाल आया है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आगे चलकर इस उछाल की रफ्तार धीमी हो सकती है। इसका कारण होगा सेबी की ओर से F&O सेगमेंट के लिए सख्त मानदंड लागू किए जाने पर डेरिवेटिव वॉल्यूम में संभावित गिरावट। बाजार विशेषज्ञों का मानना ​​है कि चूंकि NSE का F&O सेगमेंट में बेहद ज्यादा दबदबा है, इसलिए वॉल्यूम में कोई भी गिरावट एक्सचेंज की वित्तीय स्थिति और फिर वैल्यूएशन को प्रभावित करेगी।

ट्रांजेक्शन चार्जेस, एक्सचेंज के रेवेन्यू का सबसे बड़ा स्रोत हैं। अप्रैल-जून 2024 तिमाही में ट्रांजेक्शन चार्जेस के रूप में NSE को 3,600 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई। एक प्रमुख घरेलू ब्रोकिंग फर्म के अधिकारी ने कहा, "अगर सेबी के कंसल्टेशन पेपर को लागू किया जाता है, तो एक्सचेंज के लिए F&O में भागीदारी कम हो जाएगी। इसलिए स्टॉक के उछाल की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों की तरह तेज नहीं होगी।"

30 जुलाई को जारी हुआ था डिस्कशन पेपर

30 जुलाई को मार्केट रेगुलेटर (सेबी) ने एक डिस्कशन पेपर जारी किया, जिसमें बाजार की स्थिरता को बढ़ावा देने और छोटे निवेशकों की सुरक्षा के लिए सख्त डेरिवेटिव्स रेगुलेशंस का प्रस्ताव रखा गया। सुझावों में कॉन्ट्रैक्ट के आकार को 4 गुना तक बढ़ाना, ऑप्शंस प्रीमियम को एडवांस में कलेक्ट करना, वीकली कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या को कम करना जैसी कई चीजें शामिल थीं।

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