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सौरभ मुखर्जी ने Bajaj Finance में घटाई हिस्सेदारी, दूसरी जगह लगाया पैसा; क्या रही वजह

असुरक्षित कंज्यूमर लोन्स को लेकर मुखर्जी का मानना है कि फिनटेक जल्द ही अपने सुनहरे दिन देखेगा। उन्होंने कहा कि फिनटेक ने आक्रामक रूप से असुरक्षित लोन बांटे और उनके पास इसे वापस लेने के साधन नहीं हैं। कहा जा रहा है कि मुखर्जी ने RBI द्वारा कंज्यूमर लोन्स पर रिस्क वेटेज बढ़ाने से बहुत पहले ही बजाज फाइनेंस में हिस्सेदारी घटा दी थी

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 04, 2023 पर 1:53 PM
सौरभ मुखर्जी ने Bajaj Finance में घटाई हिस्सेदारी, दूसरी जगह लगाया पैसा; क्या रही वजह
17 नवंबर को RBI ने सभी कमर्शियल बैंकों और NBFC के कंज्यूमर क्रेडिट पर रिस्क वेटेज को 100 प्रतिशत से बढ़ाकर 125 प्रतिशत कर दिया।

दिग्गज इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट में गिने जाने वाले सौरभ मुखर्जी (Saurabh Mukherjea) और उनकी टीम ने NBFC बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी है। सौरभ मुखर्जी, मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स (Marcellus Investment Managers) के फाउंडर और चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने RBI द्वारा कंज्यूमर लोन्स पर रिस्क वेटेज बढ़ाने से बहुत पहले ही बजाज फाइनेंस में हिस्सेदारी घटा दी थी। मुखर्जी और उनकी टीम ने अब HDFC Bank में अलोकेशन बढ़ा दिया है।

मुखर्जी ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा, "बजाज फाइनेंस मैनेजमेंट ने अक्टूबर में दूसरी तिमाही की अर्निंग्स कॉनकॉल में B2C पोर्टफोलियो में चिंताओं को उजागर किया था। जब बजाज फाइनेंस इस तरह की कोई बात करे, तो उद्योग को ध्यान देना चाहिए। उसके बाद हमने स्टॉक में अपनी हिस्सेदारी घटा दी।" बजाज फाइनेंस के मैनेजमेंट ने कहा था कि B2C को छोड़कर अन्य सभी के लिए रिस्क मेट्रिक्स, ग्रीन बना हुआ है। B2C के लिए रिस्क मेट्रिक्स सितंबर 2023 तक येलो था। कंपनी ने यह भी कहा कि वे स्टेज-2 ग्रामीण B2C सेगमेंट की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और सुधारात्मक कार्रवाई कर रहे हैं, जिसके चलते इस सेगमेंट में मॉडरेट ग्रोथ देखी गई है।

90% से अधिक मोबाइल, लोन लेकर खरीदे जा रहे 

मुखर्जी ने कहा, "जब हम (मैं और मेरी टीम) देश भर में यात्रा कर रहे थे, तो हमें एहसास हुआ कि 20000- 30000 रुपये के छोटे, असुरक्षित लोन 25-30 प्रतिशत बढ़ रहे हैं। 90 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन, लोन लेकर खरीदे जा रहे हैं। यहां तक कि कम आय वाले कंज्यूमर्स द्वारा भी। यह हमारे लिए चिंता की बात थी। जब हमने इस बारे में बजाज फाइनेंस, HDFC Bank और चोला फाइनेंस से बात की तो उन्होंने बताया कि वे इस सेगमेंट में कटौती कर रहे हैं।"

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