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Share Markets: कब तक गिरेगा शेयर बाजार? सेंसेक्स-निफ्टी के लिए कहां है अगला सपोर्ट? एक्सपर्ट्स से जानें

Share Markets: शेयर मार्केट आखिर कब तक गिरेगा? एक दिन की राहत के बाद आज 11 मार्च को शेयर बाजार ने फिर से गिरावट का रुख पकड़ लिया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स करीब 1,342 अंक गिरकर 76,863 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 395 अंक टूटकर 23,900 के नीचे चला गया। यानी बाजार में करीब 1.75 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली

Edited By: Vikrant singhअपडेटेड Mar 11, 2026 पर 5:45 PM
Share Markets: कब तक गिरेगा शेयर बाजार? सेंसेक्स-निफ्टी के लिए कहां है अगला सपोर्ट? एक्सपर्ट्स से जानें
Stock Markets: एक्सपर्ट्स का कहना है कि तकनीकी नजरिए से बाजार का स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर बना हुआ है

Share Markets: शेयर मार्केट आखिर कब तक गिरेगा? एक दिन की राहत के बाद आज 11 मार्च को शेयर बाजार ने फिर से गिरावट का रुख पकड़ लिया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स करीब 1,342 अंक गिरकर 76,863 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 395 अंक टूटकर 23,900 के नीचे चला गया। यानी बाजार में करीब 1.75 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली।

अगर मार्च महीने की बात करें तो तस्वीर और भी चिंताजनक दिखाई देती है। अब तक के 7 ट्रेडिंग सेशन्स में से 5 दिन बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ है। सेंसेक्स-निफ्टी करीब इस दौरान 7 प्रतिशत से भी अधिक टूटकर अपने 11-महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं। सवाल यही है कि शेयर बाजार में कब तक गिरावट जारी रहेगा। सेंसेक्स और निफ्टी के लिए यहां से अगला सपोर्ट लेवल कहां है?

सबसे पहले समझते हैं कि इस गिरावट की वजह क्या है? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी जंग के अलावा मार्केट के सबसे बड़ी चिंता की बात, विदेशी निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली है। जब विदेशी फंड भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं तो लार्जकैप और ब्लू-चिप शेयरों में दबाव आ जाता है। खासकर बैंकिंग और आईटी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में बिकवाली ने बाजार को नीचे खींचा है। और यही वजह है कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव लगातार बना हुआ है।

हालांकि कुछ पॉजिटिव संकेत भी इस बीच सामने आए हैं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड का भाव जो पहले लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, अब गिरकर करीब 86 डॉलर के आसपास आ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे बड़े खरीदार देशों के लिए राहत की खबर होती है। इससे महंगाई का दबाव कम होता है और बाजार में जोखिम लेने की भावना भी थोड़ी बेहतर होती है। इसी वजह से एक दिन पहले मंगलवार को बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी।

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