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स्मॉल और मिडकैप स्पेस में रिकवरी के संकेत, एक्पर्ट्स से जानिए क्या हो निवेश रणनीति, कहां लगाएं दांव

BSE के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में पिछले 12 कारोबारी सत्रों में से 11 कारोबारी सत्रों में बढ़त देखने को मिली है। अप्रैल में BSEके मिडकैप इंडेक्स में 4.3 फीसदी की और स्मॉलकैप इंडेक्स में 5.3 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। इस बढ़त के कारण चार महीनों की गिरावट के बाद निफ्टी पहली मंथली बढ़त की और बढ़ता दिख रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 20, 2023 पर 2:50 PM
स्मॉल और मिडकैप स्पेस में रिकवरी के संकेत, एक्पर्ट्स से जानिए क्या हो निवेश रणनीति, कहां लगाएं दांव
शेयरखान के गौरव दुआ का सुझाव है कि मिड और स्मॉलकैप शेयरों में आया करेक्शन आने वाले वर्षों में बेहतर रिटर्न की हासिल करने के मौके दे रहा है

पिछले 1 साल के संघर्ष के बाद अब स्मॉल और मिडकैप शेयरों में एक बार फिर से रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। डिमांड और अर्निंग में ग्रोथ की संभावनाओं को चलते छोटे-मझोले शेयर तेजी पकड़ते दिख रहे हैं। आरबीआई की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर लगाम लगने से भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में उत्साह लौटता दिखा है। BSE के मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में पिछले 12 कारोबारी सत्रों में से 11 कारोबारी सत्रों में बढ़त देखने को मिली है। अप्रैल में BSEके मिडकैप इंडेक्स में 4.3 फीसदी की और स्मॉलकैप इंडेक्स में 5.3 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। इस बढ़त के कारण चार महीनों की गिरावट के बाद निफ्टी पहली मंथली बढ़त की और बढ़ता दिख रहा है।

बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप दोनों को इस साल की शुरुआत से मार्च के अंत तक क्रमश: 7.4 फीसदी और 9.3 फीसदी की गिरावट का सामना करना पड़ा था। साल 2022 में स्मॉलकैप में महज 1.4 फीसदी की तेजी देखने को मिली। वहीं मिडकैप में तो करीब 1.1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।

मिडकैप और स्मॉलकैप के हालिया आउटपरफॉर्मेंस के पीछे कई वजह

मार्केट एनालिस्टों को मिडकैप और स्मॉलकैप के हालिया आउटपरफॉर्मेंस के पीछे कई वजह नजर आ रही हैं। इनमें मांग में बढ़त की संभावना, अच्छा वैल्यूशन, कंपनियों की कमाई में बढ़त की उम्मीद और कमोडिटी की कीमतों में कमी जैसी वजहें शामिल हैं। इसके अलावा महंगाई के स्तर में गिरावट और आरबीई की तरफ से इकोनॉमी की ग्रोथ 6.4-6.5 फीसदी के बीच रहने के ऐलान से भी मिडकैप और स्मॉलकैप स्पेस में हरियाली आई है। आरबीआई की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी न किए जाने का भी बाजार ने स्वागत किया। इस बीच FIIs भी नेट सेलर से नेट बायर बनते दिखे हैं। इससे भी बाजार का मूड सुधरा है जिसका फायदा छोटे मझोले शेयरों को मिला है।

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