इस फार्मा शेयर ने 8 महीने में डबल कर दिया निवेश, लिस्टिंग के दिन से ही मचा रहा धमाल

Pharma Stocks: फार्मा सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी के शेयर पिछले साल मई में घरेलू मार्केट में लिस्ट हुए थे। एक साल से भी कम समय में इसने आईपीओ निवेशकों का पैसा दोगुने से अधिक बढ़ा दिया है। लिस्टिंग के बाद से यह धमाल मचा रहा है और महज 8 महीने में इसने आईपीओ निवेशकों के निवेश को डबल कर दिया है

अपडेटेड Jan 12, 2024 पर 3:50 PM
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Mankind Pharma के रेवेन्यू का 97% हिस्सा भारतीय मार्केट से मिलता है। दवाइयों की बिक्री के अलावा इसकी कंज्यूमर हेल्थकेयर सेगमेंट में भी दमदार मौजूदगी है।
     
     
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    Pharma Stocks: फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी मैनकाइंड फार्मा (Mankind Pharma) के शेयर पिछले साल मई में घरेलू मार्केट में लिस्ट हुए थे। एक साल से भी कम समय में इसने आईपीओ निवेशकों का पैसा दोगुने से अधिक बढ़ा दिया है। एक कारोबारी दिन पहले गुरुवार 11 जनवरी को यह 2260 रुपये की रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था। आज की बात करें तो मजबूत मार्केट सेंटिमेंट में यह कमजोर हुआ है। मुनाफावसूली के चलते बिकवाली के दबाव में यह डेढ़ फीसदी टूटकर 2184.80 रुपये तक आ गया। दिन के आखिरी में BSE पर यह 0.60 फीसदी की मजबूती के साथ 2231.55 रुपये (Mankind Pharma Share Price) पर बंद हुआ है।

    Mankind Pharma के शेयरों की हुई थी धांसू एंट्री

    मैनकाइंड फार्मा का 4326 करोड़ रुपये का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए पिछले साल 25 अप्रैल-27 अप्रैल 2023 के बीच खुला था। इस आईपीओ के तहत 1 रुपये की फेस वैल्यू वाले शेयर 1080 रुपये के भाव पर जारी हुए थे। इस आईपीओ को ओवरऑल 15.32 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। 9 मई को लिस्टिंग के दिन BSE पर इसने 1300 रुपये के भाव पर एंट्री मारी थी यानी आईपीओ निवेशकों को 20 फीसदी से अधिक लिस्टिंग गेन मिला था। इंट्रा-डे में पहले ही दिन यह 1325 रुपये तक पहुंच गया था। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था।


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    कैसी है कारोबारी सेहत

    मैनकाइंड फार्मा के रेवेन्यू का 97% हिस्सा भारतीय मार्केट से मिलता है। दवाइयों की बिक्री के अलावा इसकी कंज्यूमर हेल्थकेयर सेगमेंट में भी दमदार मौजूदगी है। मैनकाइंड फार्मा ने 1991 में अपना कारोबार शुरू किया था और इसके करीब 16 साल बाद वर्ष 2007 में इसने कंज्यूमर हेल्थकेयर स्पेस में एंट्री मारी थी। कंज्यूमर हेल्थकेयर सेगमेंट में यह कॉन्डोम, एमरजेंसी कांट्रासेप्टिव्स और प्रेग्नेंसी टेस्ट जैसे कि मैनफोर्स, अनवांटेड 72 और प्रेगान्यूज बेचती है। ये सभी ब्रांड्स अपने-अपने कैटेगरी में लीडर्स हैं और इनकी बिक्री वित्त वर्ष 2018-2023 के बीच सालाना 21 फीसदी की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी जबकि ओवरऑल सेगमेंट की ग्रोथ वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2023 के बीच 22 फीसदी के CAGR से बढ़ी। आज कंपनी के टॉप 20 ब्रांडों में से 18 मार्केट के टॉप 3 में शुमार हैं। इसके पोर्टफोलियो के 22 ब्रांडों का मूल्य ₹100 करोड़ से अधिक है। मैनकाइंड फार्मा भारतीय फार्मा मार्केट में वैल्यू के हिसाब से चौथी सबसे बड़ी कंपनी है।

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    कंपनी का फोकस अब क्रॉनिक ड्रग्स सेगमेंट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर है। इस सेगमेंट में मधुमेह, सांस से जुड़ी बीमारियों के इलाज से जुड़ी दवाएं शामिल हैं। वित्त वर्ष 2023 में कुल दवाईयों के बिक्री में इस सेगमेंट की 34 फीसदी हिस्सेदारी थी जो वित्त वर्ष 2018 में 28% पर थी। वित्त वर्ष 2021-23 के बीच इसका रेवेन्यू 19 फीसदी के CAGR से बढ़ा जबकि घरेलू बिजेनस 18 फीसदी के CAGR से बढ़ा। इसी दौरान कंपनी का घरेलू औसतन वॉल्यूम ग्रोथ पूरे भारतीय मार्केट मार्केट के मुकाबले तीन गुना तेजी से बढ़ा। कंपनी की योजना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आगे बढ़ने की है ताकि डॉक्टर्स का एंगेजमेंट बढ़ सके और इसका कंज्यूमर हेल्थकेयर बिजनेस बढ़े। कंपनी की योजना प्रेस्क्रिप्शन की वैल्यू बढ़ाने पर भी है। वित्त वर्ष 2023 में इसके कुल ऑपरेशन में प्रेस्क्रिप्शंस की हिस्सेदारी 68 फीसदी थी।

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