लोकसभा चुनाव के नतीजे अब करीब एक हफ्ते दूर रह गए हैं। ट्रेडर्स अपने पॉजिशन उस लेवल तक रख रहे हैं, जितना वे संभाल सकें। यह मार्केट का वह फेज है, जब कुछ बड़े इनवेस्टर्स भी खुद को कैच-22 सिचुएशन में पा रहे हैं। इसका मतलब है कि वे उलझन में हैं। खासकर वे निवेशक उलझन में हैं, जिनकी मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में बड़ी पॉजिशन है। होल्डिंग के साइज को देखते हुए वे प्राइस को डैमेज किए बगैर अपने पॉजिशन को एक सीमा से ज्यादा नहीं घटा सकते। अगर चुनावी नतीजे निराश करते हैं तो भी वे अपने पॉजिशन तुरंत खत्म नहीं कर सकते। ऐसे में उनके लिए यह मान कर चलना ठीक है कि अगर सीटों की संख्या अनुमान से कम रहती है तो भी मार्केट की प्रतिक्रिया अच्छी रहेगी या बहुत खराब नहीं रहेगी।
