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नए जमाने की टेक कंपनियों में निवेश का फैसला गलत नहीं, NFO में निवेश से बचें : सपना नारंग

सपना ने कहा कि 2004 में भारतीय बाजार में बुल रन शुरू होने के पहले उन्होंने कई मार्केट साइकिल देखे हैं। यही कारण है कि वह कहती हैं कि निवेशकों को जोखिम पर ध्यान देना चाहिए न कि केवल रिटर्न पर। उन्होंने कहा कि अगर किसी निवेशक ने इक्विटी और डेट में निवेश को 50:50 पर विभाजित कर रखा है और अगर इक्विटी बाजार में तेजी से गिरावट आती है, तो निवेशक को इक्विटी आवंटन को 75 फीसदी तक नहीं बढ़ाना चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 27, 2023 पर 11:16 AM
नए जमाने की टेक कंपनियों में निवेश का फैसला गलत नहीं, NFO में निवेश से बचें : सपना नारंग
नारंग का मानना है कि निवेश की दुनिया में सबसे अहम घटनाओं में से एक बढ़ता डिजिटलीकरण है। कोविड-19 के बाद, निवेशकों, खासकर युवा पीढ़ी के निवेशकों ने भारी मात्रा में डीमैट और शेयर ट्रेडिंग खाते खोले हैं

सपना नारंग भारत में मनी मैजमेंट सेक्टर में अपनी खास पहचान रखने वाली महिलाओं में से एक हैं। यह एक ऐसा सेक्टर है जिसमें परंपरागत रूप से पुरुषों का वर्चस्व रहा है। सपना ने 2003 में गुरुग्राम स्थित बुटीक वेल्थ मैनेजमेंट फर्म कैपिटल लीग (Capital League) की स्थापना की। बाद के वर्षों में दो अन्य महिलाएं विनीता इदनानी और राजुल कोठारी उनके साथ भागीदार के रूप में शामिल हुईं। कैपिटल लीग पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित है। इसकी सभी कर्मचारी महिलाएं हैं। नारंग का कहना है कि जब उन्होंने कंपनी शुरू की थी तो ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया था। वास्तव में, फर्म की स्थापना के समय एक पुरुष कर्मचारी था जो कंपनी की स्थापना के तुरंत बाद चला गया।

सपना नारंग और उनकी टीम ने हमेशा कारोबार पर गहरी नज़र रखी है। स्थापना के बीस साल बाद आज यह फर्म भारत की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड वितरकों और सलाहकार फर्मों में से एक है। प्राइम डेटाबेस के मुताबिक मार्च 2023 तक कंपनी की एयूएम 1,573.46 करोड़ रुपये थी। यहां हम आपके लिए मनीकंट्रोल के साथ हुई सपना नारंग की बातचीत का संपादित अंश दे रहे हैं।

क्या बाजार में गिरावट आने पर आपको इसमें तुरंत कूद पड़ना चाहिए? इस सवाल के जवाब में सपना ने कहा कि 2004 में भारतीय बाजार में बुल रन शुरू होने के पहले उन्होंने कई मार्केट साइकिल देखे हैं। यही कारण है कि वह कहती हैं कि निवेशकों को जोखिम पर ध्यान देना चाहिए न कि केवल रिटर्न पर। उन्होंने कहा कि अगर किसी निवेशक ने इक्विटी और डेट में निवेश को 50:50 पर विभाजित कर रखा है और अगर इक्विटी बाजार में तेजी से गिरावट आती है, तो निवेशक को इक्विटी आवंटन को 75 फीसदी तक नहीं बढ़ाना चाहिए। क्योंकि बाद में जब बाजार गिरते हैं तो ऐसे निवेशक घबरा जाते हैं। ये घबराहट इतनी ज्यादा होती है कि निवेश किसी भी कीमत पर इक्विटीज से निकलने लगते हैं। इसी तरह कुछ निवेशक शानदार पिछले प्रदर्शन के आधार पर केवल एक ही इक्विटी फंड में अपने पैसे का 30 फीसदी तक निवेश कर देते हैं। ये तरीके सही नहीं हैं।

सपना नारंग ने कहा कुछ ऐसे 70-वर्षीय निवेशक हैं जिन्होंने अपनी निवेश धनराशि का 80 फीसदी इक्विटी में लगा रखा है, जबकि कुछ 40-वर्षीय निवेशकों ने अपनी निवेश राशि का 80 फीसदी हिस्सा फिक्स्ड इनकम वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगा रखा। उन्होंने सलाह दी "बाजार का अनुसरण करने के बजाय निवेशकों को अपने जोखिम प्रोफ़ाइल पर कायम रहना चाहिए।"

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