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Trade setup for today: बाजार खुलने के पहले इन आंकड़ों पर डालें एक नजर, मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में होगी आसानी

Trade setup: ऊपर की ओर रुझान बनाए रखने के लिए 18888 से ऊपर का ब्रेकआउट जरूरी है। मंगलवार का 18650 के आसपास का निचला स्तर 20-डे ईएमए के साथ मेल खाता है। ये निफ्टी के लिए बड़े सपोर्ट का काम कर सकता। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे फिसलता है तो फिर डबल टॉप पैटर्न के टूट सकता है। जिससे निफ्टी में और ज्यादा मुनाफावसूली हो सकती है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jun 23, 2023 पर 8:53 AM
Trade setup for today: बाजार खुलने के पहले इन आंकड़ों पर डालें एक नजर, मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में होगी आसानी
Trade setup:23 जून को NSE पर 5 स्टॉक आरबीएल बैंक,बीएचईएल, हिंदुस्तान कॉपर, एलएंडटी फाइनेंस होल्डिंग्स और पंजाब नेशनल बैंक F&O बैन में हैं

Trade setup: 22 जून को बाजार की लगातार दो दिनों की तेजी थम गई। उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी दिन में बाजार करीब 0.50 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर कड़े रवैये के संकेत के चलते कल के कारोबार में अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। जिससे सेंटीमेंट खराब हुआ। बीएसई सेंसेक्स 284 अंक गिरकर 63239 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 86 अंक गिरकर 18771 पर बंद हुआ। निफ्टी ने डेली स्केल पर एक बियरिश कैंडलस्टिक पैटर्न बना। फिर भी ये 18700 के सपोर्ट को बचाने में कामयाब रहा। इंट्राडे में, बीएसई सेंसेक्स एक नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 फिर से अपने पिछले रिकॉर्ड उच्च स्तर के बहुत करीब पहुंच गया, लेकिन इस सप्ताह यह तीसरी बार इसको पार करने में विफल रहा।

निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में भी आठ दिनों की तेजी के बाद 1 फीसदी और 0.8 फीसदी की गिरावट के साथ मुनाफावसूली देखने को मिली।

ऑवरली चार्ट पर निफ्टी पर एक विशिष्ट 'डबल टॉप' पैटर्न बना है। एंजेल वन के तकनीकी विश्लेषक राजेश भोसले का कहना है कि इससे पता चलता है कि ऊपर की ओर रुझान बनाए रखने के लिए 18888 से ऊपर का ब्रेकआउट जरूरी है। दूसरी तरफ उनका ये भी कहना है कि मंगलवार का 18650 के आसपास का निचला स्तर 20-डे ईएमए (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) के साथ मेल खाता है। ये निफ्टी के लिए बड़े सपोर्ट का काम कर सकता। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे फिसलता है तो फिर डबल टॉप पैटर्न के टूट सकता है। जिससे निफ्टी में और ज्यादा मुनाफावसूली हो सकती है।

राजेश भोसले का ये भी कहना है कि बीच-बीच में आने वाले इस तरह के करेक्शन (चाहे वो टाइम करेक्शन हों या प्राइस करेक्शन) बाजार के लिए एक स्वस्थ संकेत हैं। इससे बाजार में भरी फालतू हवा निकल जाती है और वह ठोस होकर अगली तेजी के लिए तैयार होता है।

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