Zerodha New Feature: शेयरों की ट्रेडिंग में हमेशा मुनाफा ही हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार ऐसा होता है कि कुछ ट्रेडर्स अधिक मुनाफे के लालच में ओवरट्रेडिंग करते हैं और फिर उन्हें घाटा हो जाता है। अब इसी ओवरट्रेडिंग को रोकने के लिए डिस्काउंट ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) ने एक नया फीचर लॉन्च किया है। जीरोधा ने वर्चुअल कांट्रैक्ट नोट (Virtual Contract Note) लॉन्च किया है। हालांकि अभी यह फीचर सिर्फ जीरोधा के वेब वर्जन के लिए ही लाइव है और ऐप के लिए इसे जल्द ही लॉन्च करने की योजना है। जानिए इस नोट में कौन-कौन सी जानकारी मिलेगी और जीरोधा के सीईओ नितिन कामत (Nithin Kamath) ने ओवरट्रेडिंग की वजह क्या बताई है?
Virtual Contract Note से क्या मिलेगी जानकारी
जीरोधा के वर्चुअल कांट्रैक्ट नोट में आपने दिन भर में जो भी ऑर्डर प्लेस किया है, उस पर कितना चार्ज लगा, इसकी पूरी डिटेल्स होगी। इस नोट को जीरोधा के काइट (Kite) साइट पर ऑर्डर्स टैब में देख सकते हैं। इसमें ब्रोकरेज, एसटीटी, एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्जेज, स्टाम्प ड्यूटी, सेबी टर्नओवर चार्ज और जीएसटी की डिटेल्स रहेगी। दिन भर के सभी ऑर्डर्स के साथ-साथ हर ऑर्डर के लिए अलग-अलग चार्जेज की भी डिटेल्स मिलेगी।
Zerodha के सीईओ ने ओवरट्रेडिंग को बताया घाटे की सबसे बड़ी वजह
बाजार नियामक सेबी ने हाल ही में सभी ब्रोकर्स को ऑर्डर प्लेस करते समय ही सभी चार्जेज के बारे में बताना अनिवार्य कर दिया। इससे ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स को ऑर्डर प्लेस करते समय ही यह अंदाजा लग जाएगा कि उन्हें कितना चार्ज देना है। जीरोधा के सीईओ नितिन कामत के मुताबिक एक्टिव ट्रेडर्स पैसे गंवाते हैं, इसकी सबसे बड़ी वजह ओवरट्रेडिंग है। नितिन के मुताबिक आमतौर पर ट्रेडर्स बेहिसाब ट्रेडिंग इसलिए करते हैं क्योंकि ब्रोकरेज कॉस्ट कम है तो वे स्टॉक मार्केट में अधिक से अधिक पैसे लगाने की कोशिश करते हैं।
नितिन के मुताबिक ओवरट्रेडिंग से घाटा होने के आसार बढ़ जाते हैं। बता दें कि हर ऑर्डर के लिए ब्रोकरेज सीमित है लेकिन एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स), एक्सचेंज ट्रांजैक्शन कॉस्ट्स, स्टाम्प ड्यूटी और इंपैक्ट कॉस्ट जैसे अन्य चार्जेज टर्नओवर के फीसदी के रूप में लगता है और जब वॉल्यूम बढ़ता है तो यह एक्सपोनेंशियली तरीके या यानी बहुत तेजी से बढ़ता है।