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सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सर्विसेज: DoT की नई कड़ी सिक्योरिटी गाइडलांइस, Starlink जैसे विदेशी ऑपरेटर्स को अब इन नियमों का करना होगा पालन

नए दिशानिर्देश विदेशी ऑपरेटर्स के लिए सिक्योरिटी रिक्वायरमेंट्स को लेकर अनिश्चितता को दूर करते हैं और कंप्लायंस के लिए एक क्लियर फ्रेमवर्क की पेशकश करते हैं। इंडियन टेरिटेरी में संचालित सभी डिवाइसेज के लिए अब यूजर टर्मिनल रजिस्ट्रेशन और रियल टाइम ऑथेंटिकेशन अनिवार्य है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड May 05, 2025 पर 11:19 PM
सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सर्विसेज: DoT की नई कड़ी सिक्योरिटी गाइडलांइस, Starlink जैसे विदेशी ऑपरेटर्स को अब इन नियमों का करना होगा पालन
नए निर्देशों को अब यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट के चैप्टर XII में शामिल किया गया है।

दूरसंचार विभाग (DoT) ने सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सर्विसेज पर कंट्रोल को कड़ा करने के मकसद से कड़े सुरक्षा दिशा-निर्देशों का एक नया सेट जारी किया है। ये निर्देश ऐसे वक्त पर सामने आए हैं, जब स्टारलिंक और एमेजॉन की प्रोजेक्ट कुइपर जैसी ग्लोबल सैटेलाइट दिग्गज भारत में ऑपरेशंस के लिए GMPCS (ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशंस बाय सैटेलाइट) लाइसेंस की मांग कर रही हैं।

नए निर्देशों को अब यूनिफाइड लाइसेंस (UL) एग्रीमेंट के चैप्टर XII में शामिल किया गया है। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा नियंत्रणों को सुदृढ़ करना है। दिशा-निर्देश GMPCS लाइसेंसहोल्डर्स, विशेष रूप से विदेशी ऑपरेटर्स के लिए ऑपरेशनल और डेटा कंप्लायंस को काफी हद तक कड़ा करते हैं।

क्या कहते हैं नए गाइडेंस

अपडेटेड फ्रेमवर्क के तहत, कंपनियों को अब भारतीय टेरिटेरी के अंदर हर प्रस्तावित गेटवे हब लोकेशन के लिए सिक्योरिटी क्लायरेंस हासिल करने होंगे। दिशा-निर्देश, मजबूत मॉनिटरिंग और वैध इंटरसेप्शन कैपेबिलिटीज को अनिवार्य करते हैं। इन्हें कमर्शियल ऑपरेशंस शुरू होने से पहले गेटवेज, पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoPs), नेटवर्क कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सेंटर्स (NCMCs), या किसी भी समकक्ष इंफ्रास्ट्रक्चर में स्पष्ट रूप से फंक्शनल होना चाहिए।

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