US vs China: इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी पर कब्जे की लड़ाई, इस कारण नए दौर का गोल्ड है इसका कचरा

US vs China: ईवी में इस्तेमाल होने वाली बैटरी की लाईफ 10 साल या इससे अधिक होती है। आने वाला जमाना ईवी का है और अभी जो ईवी इस्तेमाल हो रही हैं, उसकी बैटरी की लाईफ खत्म होने पर उसे रिसाईकिल किया जाता है। अभी इसे रिसाईकिल करने के मामले में चीन किंग है लेकिन अमेरिका इसे कड़ी टक्कर दे सकता है

अपडेटेड Jul 22, 2023 पर 10:54 AM
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US vs China: ईवी रिसाइकलिंग को लेकर अमेरिका में कंपनियों को सपोर्ट मिल सकता है लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यील्ड को लेकर है। अभी इस मामले में चीन किंग है।

US vs China: चीन से ईवी बैटरी रिसाईकिलिंग का मार्केट छीनने की कोशिशों में अमेरिका सबसे आगे हैं। इसके लिए कंपनियों को किसी खास सपोर्ट का इंतजार भी नहीं करना है क्योंकि वहां पहले से ही इसके लिए प्रावधान है। अमेरिका के इनफ्लेशन रिडक्शन एक्ट (IRA) में एक क्लॉज ऐसा है जिसके आधार पर उत्तरी अमेरिका में कंपनियां इन्हें रिसाईकिल करने की कोशिश कर रही हैं। इस क्लॉज के तहत इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों (EV) की बैटरी के मैटेरियल को रिसाईकिल करने पर कंपनियां अपने आप ईवी प्रोडक्शन से जुड़ी सब्सिडी पा सकती हैं। आसान भाषा में कहें तो इन बैटरीज को रिसाईकिल करने के लिए सब्सिडी बहुत बड़ा सपोर्ट है और यह अपने देश में बनाई गई चीजों पर मिलती है तो IRA के एक प्रावधान के तहत ईवी बैटरी को रिसाईकिल करने पर यह सब्सिडी हासिल की जा सकती है।

चीन को कैसे मिलेगी टक्कर

इसे लेकर न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इंडस्ट्री के एक दर्जन से अधिक अधिकारियों और एक्सपर्ट्स से बातचीत की जिनका मानना है कि इससे अमेरिका में फैक्ट्री बनाने में तेजी आएगी और गाड़ी कंपनियों को भी रिसाईकिल बैटरी पर रिसर्च करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। ईवी में इस्तेमाल होने वाली बैटरी की लाईफ 10 साल या इससे अधिक होती है। आने वाला जमाना ईवी का है और अभी जो ईवी इस्तेमाल हो रही हैं, उसकी बैटरी की लाईफ खत्म होने पर उसे रिसाईकिल किया जाता है। अभी इसे रिसाईकिल करने के मामले में चीन किंग है लेकिन अमेरिका इसे कड़ी टक्कर दे सकता है। रिसर्च फर्म ईएमआर के मुताबिक दुनिया भर में जितनी ईवी बैटरी रिसाईकिल होती है, अभी लगभग सब चीन करता है और इसका मार्केट 2022 में 1100 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2028 तक 1800 डॉलर का हो सकता है।


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कितनी अहम है रिसाईकलिंग

ईवी बैटरी में मुख्य रूप से लीथियम इस्तेमाल होता है। इसके अलावा कोबाल्ट और निकिल भी इस्तेमाल होता है। रॉयटर्स से बातचीत में बीएमडब्ल्यू के सस्टेनिबिलिटी चीफ थॉमस बेकर ने कहा कि एक कार में इन मिनरल की वैल्यू करीब 1000 यूरो (1123 डॉलर) से लेकर 2 हजार यूरो (2246 डॉलर) की है। कनाडा की बैटरी रिसाइकलिंग फर्म ली-साईकिल के वाइस प्रेसिडेंट लुई डियाज के मुताबिक अब जैसे-जैसे ईवी गाड़ियों का उत्पादन बढ़ रहा है तो कुछ वर्षों में इनकी सप्लाई सुस्त हो सकती है जबकि इन्हें बिना ताकत खोए अनगिनत बार रिसाईकल किया जा सकता है। रेडवुड मैटेरियल्स के सीईओ JB Straubel का कहना है कि आईआरए के तहत रिसाईकल की हुई बैटरी के मैटेरियल को कचरे से निकाला हुआ माना जाएगा, ना कि माइन किया हुआ यानी इस प्रकार यह स्थानीय तौर पर बना प्रोडक्ट माना जाएगा।

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रिसाइकलिंग में लेकर ये है सबसे बड़ी चुनौती

ईवी रिसाइकलिंग को लेकर अमेरिका में कंपनियों को सपोर्ट मिल सकता है लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यील्ड को लेकर है। रिसाइकलिंग के लिए यूरोप और अमेरिका में बैटरी को पार्ट-पार्ट करने वाली अमेरिका के टेक्सस की इकोबैट (Ecobat) ने अपनी रिकवरी प्रोसेस में सुधार किया है। इसकी चीफ कॉमर्शियल ऑफिसर थिया सुले (Thea Soule) के मुताबिक अब रिसाईकलिंग के लिए बैटरी-सेल लीथियम का करीब 70 फीसदी उपलब्ध है। हालांकि उनका कहना है कि 90 से 100 फीसदी तक पहुंचाना है और इसकी वजह ये है कि आठ साल के भीतर यूरोपीय यूनियन (EU) ईवी में बैटरी में रिसाइकल किए हुए लीथियम, कोबाल्ट और निकिल का मिनिमम अमाउंड अनिवार्य करेगा। इसके अलावा यूरोप के बाहर रिसाईकलिंग पर कठोर शर्तें लगाए जाएंगी।

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इसके अलावा पुरानी ईवी पर नजर बनाए रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। अब कुछ गाड़ी कंपनियां इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर नजर रख रही हैं ताकि रिसाईकलिंग के लिए ये उपलब्ध हो सकें। ऐसे में निसान (Nissan) ने बैटरियों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए जापान में ईवी को लीज पर देना शुरू कर दिया है, जबकि चीन की नियो (Nio) बैटरियां लीज पर दे रही है।

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