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रूस, श्रीलंका के डिफॉल्ट से भारतीय बैंक भी सतर्क, पेमेंट मिलने में हो रही देर

अमेरिकी और यूरोपीय बैंकों ने रूस में अपना कामकाज बंद कर दिया है जिससे भारतीय आयातकों को अपने letters of credit प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 14, 2022 पर 11:12 AM
रूस, श्रीलंका के डिफॉल्ट से भारतीय बैंक भी सतर्क, पेमेंट मिलने में हो रही देर
बैंकर्स का मानना है कि पश्चिमी देशों द्वारा रूस के सभी व्यापारिक भागीदारों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने से स्थिति और खराब हो सकती है

रूस और श्रीलंका लोन का पेमेंट नहीं कर पा रहे हैं। इससे इंडिया में भी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में डर है। बैंकों में ट्रेड से जुड़े ट्राजेंक्शन में देरी हो रही है। इधर, भारत और रूस रुपया-रूबल में पेमेंट के लिए नए समझौते की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, इस समझौते पर हस्ताक्षर होने बाकी हैं। दरअसल, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे कई इंडियन बैंकों को भी दिक्कत आ रही है। इंडिया के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व में इन दिक्कतों को दूर करे की कोशिश हो रही है।

SBI ने मार्च में ग्राहकों को कहा था, "अमेरिका, यूरोपीय संघ या संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल संस्थाओं, बैंकों, बंदरगाहों या जहाजों से जुड़ा कोई भी लेनदेन, चाहे वह किसी भी मुद्रा में हो, उसे प्रोसेस नहीं किया जाएगा।"

कुछ बैंकरों का मानना है कि अगर पश्चिमी देश रूस के सभी ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ प्रतिबंध लगाते हैं तो स्थिति और खराब हो सकती है। भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिन्होंने रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को पूरी तरह से नहीं तोड़ा है।

Dhanlaxmi Bank के ट्रेजरी हेड RK Gurumurthy ने कहा, “अमेरिका और यूरोपीय प्रतिबंधों के कारण रूसी एसेट फ्रीज हो गए हैं। इससे भारत के ट्रेड से जुड़े ट्रांजेक्शन में देरी होगी। नॉन-डॉलर सेटलमेंट में ट्रेड को शिफ्ट करना आसान नहीं होगा। रूस में अमेरिकी और यूरोपीय बैंकों ने अपना कामकाज बंद कर दिया है। इसका मतलब है कि भारतीय आयातकों को अपने एलसी (letters of credit) ओपन करने या इसका कन्फर्मेशन प्राप्त करने में कठिनाई होगी।"

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