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Budget 2026: क्या बजट का असर 8वें वेतन आयोग पर नजर आएगा? सैलरी हाइक में निभाएगा भूमिका

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के लागू होने में देरी का असर सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि सरकार के बजट और खर्चों पर भी पड़ेगा। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तैयार होने में 15 से 18 महीने का वक्त ले सकती हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 19, 2026 पर 6:11 PM
Budget 2026: क्या बजट का असर 8वें वेतन आयोग पर नजर आएगा? सैलरी हाइक में निभाएगा भूमिका
8th Pay Commission: जनवरी 2026 निकल जाने के बाद अब यह साफ हो गया है कि 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी फिलहाल नहीं होने वाली है।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के लागू होने में देरी का असर सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि सरकार के बजट और खर्चों पर भी पड़ेगा। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तैयार होने में 15 से 18 महीने का वक्त ले सकती हैं। इसका मतलब यह है कि नया सैलरी सिस्टम 2026 में लागू होना मुश्किल दिख रहा है। जनवरी 2026 निकल जाने के बाद अब यह साफ हो गया है कि 8वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी फिलहाल नहीं होने वाली है। लंबे समय से उम्मीद थी कि नया सैलरी स्ट्रक्चर जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि इसमें काफी देरी हो सकती है।

परंपरा के मुताबिक, हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू होता है। इससे पहले 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था। इसी आधार पर 8वें वेतन आयोग से भी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन अब तक न तो रिपोर्ट आई है और न ही सरकार ने कोई अंतिम फैसला किया है।

ICRA का कहना है कि जब भी 8वां वेतन आयोग लागू होगा, सरकार इसे 1 जनवरी 2026 से ही लागू कर सकती है, यानी रेट्रोस्पेक्टिव असर के साथ। ऐसा हुआ तो कर्मचारियों को एक साथ लंबा एरियर मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह एरियर 15 महीने या उससे ज्यादा का हो सकता है, जिससे सरकार पर एक साथ बड़ा फाइनेंशियल बोझ पड़ेगा।

रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि वेतन आयोग लागू होने वाले साल में सरकार का सैलरी और पेंशन खर्च 40 से 50 फीसदी तक बढ़ सकता है। इसका असर सीधे सरकार के खजाने पर पड़ेगा। पहले भी ऐसा देखा गया है। 7वें वेतन आयोग के समय सिर्फ 6 महीने के एरियर के बावजूद सैलरी खर्च में 20 फीसदी से ज्यादा उछाल आया था। वहीं 6वें वेतन आयोग के दौरान ढाई साल से ज्यादा का एरियर देना पड़ा था, जिससे कई साल तक बजट पर दबाव बना रहा।

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