आज के दौर में जब हर कारोबार को बढ़ने के लिए पूंजी की जरूरत होती है, तब सवाल उठता है कि बिजनेस लोन लिया जाए या फिर ओवरड्राफ्ट सुविधा का इस्तेमाल किया जाए। दोनों ही विकल्प बैंकों द्वारा दिए जाते हैं, लेकिन इनका उपयोग और फायदे अलग-अलग हैं।

आज के दौर में जब हर कारोबार को बढ़ने के लिए पूंजी की जरूरत होती है, तब सवाल उठता है कि बिजनेस लोन लिया जाए या फिर ओवरड्राफ्ट सुविधा का इस्तेमाल किया जाए। दोनों ही विकल्प बैंकों द्वारा दिए जाते हैं, लेकिन इनका उपयोग और फायदे अलग-अलग हैं।
बिजनेस लोन एक निश्चित राशि के लिए लिया जाता है। बैंक आपके बिजनेस की जरूरतों और क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर तय करता है कि आपको कितनी रकम दी जा सकती है। इस लोन पर तय ब्याज दर लगती है और आपको EMI के रूप में इसे चुकाना होता है। इसका फायदा यह है कि आपको एकमुश्त बड़ी राशि मिल जाती है, जिससे आप मशीनरी खरीद सकते हैं, नए प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं या बिजनेस का विस्तार कर सकते हैं। लेकिन इसकी कमी यह है कि चाहे आप पूरी राशि का इस्तेमाल करें या नहीं, आपको पूरे लोन पर ब्याज चुकाना पड़ता है।
दूसरी ओर, ओवरड्राफ्ट सुविधा आपके चालू खाते से जुड़ी होती है। इसमें बैंक आपको आपकी जमा राशि या तय सीमा से अधिक खर्च करने की अनुमति देता है। यानी अगर आपके खाते में बैलेंस कम है, तो भी आप ओवरड्राफ्ट लिमिट तक पैसे निकाल सकते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको ब्याज सिर्फ उतनी राशि पर देना होता है जितना आपने इस्तेमाल किया है। यह सुविधा उन कारोबारियों के लिए बेहतर है जिन्हें रोजाना कैश फ्लो मैनेज करना होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपका बिजनेस लंबे समय के निवेश की मांग करता है, तो बिजनेस लोन सही विकल्प है। वहीं अगर आपको अल्पकालिक जरूरतों और कैश फ्लो की समस्या से निपटना है, तो ओवरड्राफ्ट ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।
बैंक इन दोनों सुविधाओं से अच्छी-खासी कमाई करते हैं। बिजनेस लोन पर ब्याज और प्रोसेसिंग फीस उनकी आय का बड़ा हिस्सा होती है, जबकि ओवरड्राफ्ट पर ब्याज दरें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।
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