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डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को 25,000 रुपये तक मुआवजा, जानिए इसके नियम और शर्तें

RBI का यह प्रस्ताव उस ड्राफ्ट अमेंडमेंट्स का हिस्सा है, जिसे केंद्रीय बैंक ने 6 मार्च को जारी किया। आरबीआई डिजिटल ट्रांजेक्शंस में कस्टमर की लायबिलिटी से जुड़े फ्रेमवर्क को रिव्यू कर रहा है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस बारे में 6 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करने के दौरान ऐलान किया था

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Mar 07, 2026 पर 12:39 PM
डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को 25,000 रुपये तक मुआवजा, जानिए इसके नियम और शर्तें
केंद्रीय बैंक का नया प्रस्ताव 1 जुलाई, 2026 को या इसके बाद हुए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शंस पर लागू होगा।

आरबीआई ने आम आदमी के हित में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित पेश किया है। इसमें कहा गया है कि कम अमाउंट के डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को मुआवजा मिलेगा। इसमें व्यक्ति को नुकसान के 85 फीसदी तक मुआवजा मिल सकता है। इसके लिए 25,000 रुपये की लिमिट तय की गई है। यह मुआवजा एक व्यक्ति को सिर्फ एक बार ही मिलेगा। इसका मतलब है कि अगर व्यक्ति एक से ज्यादा बार फ्रॉड का शिकार होता है तो उसे बार-बार मुआवजा नहीं मिलेगा।

आरबीआई ने 6 मार्च को पेश किया ड्राफ्ट प्रपोजल

RBI का यह प्रस्ताव उस ड्राफ्ट अमेंडमेंट्स का हिस्सा है, जिसे केंद्रीय बैंक ने 6 मार्च को जारी किया। आरबीआई डिजिटल ट्रांजेक्शंस में कस्टमर की लायबिलिटी से जुड़े फ्रेमवर्क को रिव्यू कर रहा है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस बारे में 6 फरवरी को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करने के दौरान ऐलान किया था। केंद्रीय बैंक का नया प्रस्ताव 1 जुलाई, 2026 को या इसके बाद हुए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शंस पर लागू होगा। आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर लोगों की राय मांगी है। 6 अप्रैल, 2026 तक इस पर राय दी जा सकती है।

मैक्सिमम 25,000 रुपये तक मिलेगा मुआवजा

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