Get App

डायरेक्ट फंड्स चुनें या रेगुलर? जानिए कैसे करें म्यूचुअल फंड में सही तरीके से निवेश का फैसला

Direct vs Regular Mutual Funds: डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में फर्क लागत और गाइडेंस का है। डायरेक्ट फंड सस्ते होते हैं और बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, जबकि रेगुलर फंड एडवाइजर की मदद देते हैं। सही चुनाव आपकी समझ और निवेश व्यवहार पर निर्भर करता है।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड May 03, 2026 पर 4:43 PM
डायरेक्ट फंड्स चुनें या रेगुलर? जानिए कैसे करें म्यूचुअल फंड में सही तरीके से निवेश का फैसला
डायरेक्ट फंड का एक्सपेंस रेशियो कम होता है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर को कोई कमीशन नहीं दिया जाता।

Direct vs Regular Mutual Funds: अगर आपने कभी म्यूचुअल फंड के विकल्प देखे हैं, तो आपने जरूर नोटिस किया होगा कि एक ही फंड दो तरह में आता है- डायरेक्ट और रेगुलर। पहली नजर में दोनों एक जैसे लगते हैं। एक ही पोर्टफोलियो, एक ही फंड मैनेजर, एक ही स्ट्रैटेजी। लेकिन एक अहम फर्क है, जो समय के साथ आपकी कमाई को प्रभावित करता है।

बुनियादी फर्क क्या है

डायरेक्ट और रेगुलर फंड में असली फर्क सिर्फ इस बात का है कि आप निवेश कैसे करते हैं। डायरेक्ट फंड सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी से खरीदे जाते हैं, या ऐसे प्लेटफॉर्म के जरिए जहां कोई बिचौलिया नहीं होता। वहीं रेगुलर फंड किसी एजेंट, डिस्ट्रीब्यूटर या एडवाइजर के जरिए खरीदे जाते हैं, जो पूरी प्रक्रिया में आपकी मदद करते हैं। यही बीच की परत लागत को बदल देती है।

डायरेक्ट फंड में रिटर्न ज्यादा क्यों दिखता है

सब समाचार

+ और भी पढ़ें