Gold Outlook: दिग्गज ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने सोने की कीमत को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है। अब ब्रोकरेज का कहना है कि 2026 के अंत तक गोल्ड $5,400 प्रति औंस तक पहुंच सकता है।

Gold Outlook: दिग्गज ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने सोने की कीमत को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है। अब ब्रोकरेज का कहना है कि 2026 के अंत तक गोल्ड $5,400 प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
इससे पहले यह अनुमान $4,900 प्रति औंस था। Goldman Sachs के मुताबिक, प्राइवेट सेक्टर के निवेशक और उभरते बाजारों के सेंट्रल बैंक लगातार गोल्ड की तरफ पैसा लगा रहे हैं, इसी वजह से अनुमान ऊपर किया गया है।
2026 में अभी 12% बढ़ सकता है दाम
बुधवार को स्पॉट गोल्ड $4,887.82 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, गुरुवार को यह मामूली गिरावट के साथ $4,834 के आसपास कारोबार कर रहा था। गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, यहां से अभी 12% तेजी आने की उम्मीद है।
Goldman Sachs ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मजबूत खरीदारी के चलते 2026 की शुरुआत में ही गोल्ड का स्तर काफी ऊपर चला गया है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि यह डायवर्सिफिकेशन ट्रेंड पूरे 2026 में बना रहेगा। निवेशक जल्दबाजी में अपनी गोल्ड होल्डिंग नहीं बेचेंगे।
भारत में कितना उछल सकता है सोना
भारत में MCX पर सोने की कीमत फिलहाल 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि अभी 2026 में कीमतों में करीब 12% उछाल आ सकता है। इस हिसाब से गोल्ड का भाव करीब 1.69 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। यानी अभी इस साल सोने की कीमतों में करीब 18000 रुपये की बढ़ोतरी की गुंजाइश है।
2026 में अब तक 11% की तेजी
सोने को दुनिया का सबसे सुरक्षित निवेश समझा जाता है। इसने 2026 में अब तक 11% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। इससे पहले पिछले साल यानी 2025 में गोल्ड की कीमतों में करीब 64% की बड़ी तेजी देखने को मिली थी।
किस वजह से बढ़ रहा सोने का दाम
Goldman Sachs का कहना है कि प्राइवेट सेक्टर के निवेशक ग्लोबल पॉलिसी से जुड़े जोखिमों से बचने के लिए गोल्ड को हेज के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। ब्रोकरेज को नहीं लगता कि ये निवेशक 2026 में अपनी पोजिशन खत्म करेंगे।
इसके अलावा, Goldman का अनुमान है कि 2026 में सेंट्रल बैंक औसतन 60 टन गोल्ड की खरीद कर सकते हैं। खासतौर पर उभरते बाजारों के सेंट्रल बैंक अपने फॉरेक्स रिजर्व का बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे गोल्ड में शिफ्ट कर रहे हैं।
ETF से भी गोल्ड को मिल सकता है सपोर्ट
Goldman Sachs का मानना है कि पश्चिमी देशों में गोल्ड ETF में निवेश बढ़ सकता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि 2026 में US Federal Reserve द्वारा 50 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर कटौती की संभावना जताई जा रही है। आमतौर पर जब ब्याज दरें घटती हैं, तो बिना ब्याज देने वाली एसेट्स, जैसे गोल्ड, ज्यादा आकर्षक हो जाती हैं।
गोल्ड के लिए सबसे बड़ा जोखिम क्या है?
हालांकि Goldman ने यह भी साफ किया है कि गोल्ड के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर लंबी अवधि की अनिश्चितता अचानक कम हो जाती है, तो इससे गोल्ड की कीमतों पर दबाव आ सकता है। खासकर तब, जब पॉलिसी रिस्क के खिलाफ बनाए गए बड़े मैक्रो हेज तेजी से लिक्विडेट होने लगें।
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