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Gold Price Prediction: क्या सोना 70,000 रुपये प्रति तोला होगा? क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Gold Rate: सोने के दाम लोगों को काफी उलझन में डाल रहे हैं। कभी कीमतें तेजी से गिरती हैं, तो कभी अचानक उछाल आ जाता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना फिर से 70,000 रुपये प्रति तोला तक आ सकता है या यहां से दोबारा ऊपर जाएगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 05, 2026 पर 5:11 PM
Gold Price Prediction: क्या सोना 70,000 रुपये प्रति तोला होगा? क्या कहते हैं एक्सपर्ट
Gold Rate: सोने के दाम लोगों को काफी उलझन में डाल रहे हैं।

Gold Rate: सोने के दाम लोगों को काफी उलझन में डाल रहे हैं। कभी कीमतें तेजी से गिरती हैं, तो कभी अचानक उछाल आ जाता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना फिर से 70,000 रुपये प्रति तोला तक आ सकता है या यहां से दोबारा ऊपर जाएगा? अगर एक्सपर्ट की माने तो सोना कभी इतना नीचे नहीं जाएगा।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने की कीमतों में आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका से जुड़े आर्थिक घटनाक्रम हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव बढ़ने और वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली नीतियों के चलते डॉलर मजबूत हो रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो आमतौर पर सोने पर दबाव आता है। ऐसे समय में निवेशक सोने से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों की ओर रुख करते हैं।

दूसरी अहम वजह है वैश्विक तनाव में कमी। पिछले कुछ सालों में रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे थे। डर और अनिश्चितता के माहौल में सोने की मांग बढ़ती है। लेकिन अब राजनीतिक स्तर पर संकेत मिल रहे हैं कि हालात धीरे-धीरे शांत हो सकते हैं। इससे निवेशक सोने में किए गए मुनाफे को निकालकर शेयर बाजार की तरफ बढ़ रहे हैं। इस प्रक्रिया को बाजार की भाषा में प्रॉफिट बुकिंग कहा जाता है, जो सोने की कीमतों को नीचे धकेल रही है।

अब सवाल यह है कि गिरावट कितनी गहरी हो सकती है। एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है, लेकिन कई जानकार मानते हैं कि मौजूदा हालात में सोने का 70,000 रुपये प्रति तोला तक आना पूरी तरह नामुमकिन नहीं है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपने अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ता है, तो भारतीय बाजार में भी तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके अलावा अगर रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है, तो सोना आयात करना सस्ता पड़ेगा, जिससे घरेलू कीमतों पर और दबाव बन सकता है।

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