एक परिवार को पुराने समय से संभालकर रखे गए शेयर विरासत में मिले। वक्त बीता, जरूरत आई तो उन्हें बेचने का फैसला किया गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल सामने था, इनकी खरीद कीमत यानी कॉस्ट क्या मानी जाए? यही कन्फ्यूजन आज कई निवेशकों की है। अच्छी बात यह है कि टैक्स के नियम इस मामले में साफ हैं, बस उन्हें सही तरीके से समझने की जरूरत है।
