म्यूचुअल फंडों की स्मॉलकैप और मिडकैप स्कीमों ने पिछले तीन साल में निवेशकों को मालामाल किया है। यही वजह है कि इन स्कीमों में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। एंफी के आंकड़ों से इस बात की पुष्टि होती है। पिछले चार साल में मिडकैप फंडों के इनवेस्टर अकाउंट की संख्या करीब दोगुनी यानी 1.4 करोड़ हो गई है। स्मॉलकैप फंडों के इनवेस्टर अकाउंट की संख्या करीब चार गुनी यानी 1.9 करोड़ हो गई है। मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों में निवेश करने से पहले आपको कुछ बुनियादी बातों को जान लेना जरूरी है। सबसे पहले यह कि इन फंडों में निवेश करने में रिस्क ज्यादा है।
