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Retirement Planning: सीनियर सिटीजन्स के लिए FD पर TDS बचाने के नए आसान तरीके, जानिए कैसे मिलेगा फायदा

Retirement Planning: भारत में सीनियर सिटीजन के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प माना जाता है। रिटायरमेंट के बाद जब नियमित आय का स्रोत कम हो जाता है, तब FD का ब्याज ही कई लोगों के लिए आर्थिक सहारा बनता है। लेकिन अक्सर इस ब्याज पर TDS (Tax Deducted at Source) कटने से बुजुर्गों को परेशानी होती है।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Jan 11, 2026 पर 4:07 PM
Retirement Planning: सीनियर सिटीजन्स के लिए FD पर TDS बचाने के नए आसान तरीके, जानिए कैसे मिलेगा फायदा

रिटायरमेंट के बाद जमा पूंजी को सुरक्षित रखने का सबसे पसंदीदा जरिया फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। बैंक या पोस्ट ऑफिस में निवेश करने पर निश्चित ब्याज मिलता रहता है, जो दवाइयों, घर के खर्च और छोटे-मोटे जरूरतों को आसानी से पूरा कर देता है। लेकिन ब्याज आने पर टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) कटने की चिंता बुजुर्गों को परेशान कर देती है। अच्छी खबर यह है कि 1 अप्रैल 2025 से लागू नए नियमों से सीनियर सिटीजन्स ₹1 लाख तक ब्याज पर पूरी तरह TDS से मुक्त हैं, और स्मार्ट प्लानिंग से इससे ज्यादा पर भी बच सकते हैं।

कब लगता है TDS?

बैंकों और पोस्ट ऑफिस में जमा FD पर अगर ब्याज की राशि सालाना ₹50,000 से अधिक हो जाती है, तो उस पर TDS काटा जाता है। यह नियम खासतौर पर सीनियर सिटीज़न को प्रभावित करता है, क्योंकि वे अक्सर बड़ी रकम FD में रखते हैं ताकि सुरक्षित रिटर्न मिल सके।

हर बैंक में अलग ₹1 लाख की सीमा

अब एक वित्त वर्ष में किसी एक बैंक या पोस्ट ऑफिस से ₹1 लाख तक का FD ब्याज TDS मुक्त है। यह सरकारी, निजी, कोऑपरेटिव बैंकों और पोस्ट ऑफिस पर लागू होता है। मिसाल के तौर पर बिना किसी कटौती के 8% ब्याज दर पर ₹12-13 लाख की FD से सालाना ₹1 लाख ब्याज बनेगा। लेकिन अगर एक ही बैंक से ज्यादा हो जाए, तो TDS कट सकता है।

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