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New Labour Codes: नए श्रम कानूनों का कर्मचारियों और कंपनियों पर क्या होगा असर, समझिए पूरी तस्वीर

New Labour Codes: नए लेबर कोड भारत की नौकरी, सैलरी, ग्रैच्यूटी और गिग वर्करों की जिंदगी को पूरी तरह बदल देंगे। महिलाओं की नाइट शिफ्ट से लेकर एक साल में ग्रैच्यूटी और डिजिटल फाइलिंग तक- ये बदलाव आपके कामकाजी भविष्य को कैसे प्रभावित करेंगे, जानिए।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Nov 22, 2025 पर 5:41 PM
New Labour Codes: नए श्रम कानूनों का कर्मचारियों और कंपनियों पर क्या होगा असर, समझिए पूरी तस्वीर
भारत में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को श्रम कानूनों के तहत आधिकारिक मान्यता मिली है।

New Labour Codes: भारत का श्रम ढांचा 21 नवंबर 2025 को एक ही दिन में पूरी तरह बदल गया, जब सरकार ने चार नई लेबर कोड्स लागू कर दिए। वेतन, इंडस्ट्रियल रिलेशंस, सोशल सिक्योरिटी और सेफ्टी-हेल्थ पर आधारित ये कोड अब 29 अलग-अलग पुराने कानूनों की जगह ले चुके हैं। इसका मतलब है कि दशकों पुराने नियमों को हटाकर भारत ने एक आधुनिक और डिजिटल-फ्रेंडली लेबर सिस्टम को अपनाया है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत का जॉब मार्केट तेजी से बढ़ा है। 2017-18 से 2023-24 के बीच देश में 16 करोड़ से ज्यादा नौकरियां जुड़ीं। बेरोजगारी 6% से घटकर 3.2% हो गई। 1.5 करोड़ से ज्यादा महिलाएं औपचारिक रोजगार में आईं। लेकिन यह नई अर्थव्यवस्था अब भी उन्हीं पुराने नियमों से चल रही थी जो एक अलग समय और जरूरत के हिसाब से लिखे गए थे।

चारों लेबर कोड्स इसी गैप को भरने की कोशिश करते हैं, ताकि पुरानी, उलझी हुई और एक-दूसरे से टकराती व्यवस्थाओं की जगह एक साफ, आधुनिक और सरल ढांचा लागू हो सके। आइए समझते हैं कि नए लेबर कोड वेतन, सुरक्षा, नौकरी, लाभ और रोजमर्रा के कामकाज को कैसे बदलने जा रहे हैं।

कर्मचारियों और कंपनियों के लिए क्या बदला

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