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New Labour Codes: क्या नए लेबर कोड्स से एंप्लॉयीज के अकाउंट में आने वाली सैलरी घट जाएगी और टैक्स बढ़ जाएगा?

New Labour Codes: एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए लेबर कोड्स की वजह से एंप्लॉयीज की सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है। इसकी वजह वह नियम है, जिसमें कहा गया है कि एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी उसकी टोटल कॉस्ट टू कंपनी (CTC) का कम से कम 50 फीसदी होनी चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 26, 2026 पर 2:56 PM
New Labour Codes: क्या नए लेबर कोड्स से एंप्लॉयीज के अकाउंट में आने वाली सैलरी घट जाएगी और टैक्स बढ़ जाएगा?
एंप्लॉयीज के कंपनसेशन के कई प्रमुख कंपोनेंट्स बेसिक सैलरी से जुड़े होते हैं।

सरकार ने चार नए लेबर कोड्स लागू कर दिए हैं। इनका असर एंप्लॉयीज की सैलरी, बेनेफिट्स और सोशल सिक्योरिटीज पर पड़ेगा। सरकार के पुराने 29 लेबर कानूनों की जगह अब सिर्फ 4 कानून होंगे। सरकार ने कानून को आसान बनाने और एंप्लॉयीज के लिए सोशल सिक्योरिटीज बढ़ाने के लिए नए कोड़्स लागू किए हैं। सवाल है कि नए कानूनों का हर महीने एंप्लॉयीज के बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी पर क्या असर पड़ेगा? क्या इससे एंप्लॉयीज की सैलरी बढ़ जाएगी?

बेसिक सैलरी सीटीसी की कम से कम 50 फीसदी होगी 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए लेबर कोड्स की वजह से एंप्लॉयीज की सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है। नए लेबर कोड्स में कहा गया है कि एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी उसकी टोटल कॉस्ट टू कंपनी (CTC) की कम से कम 50 फीसदी होनी चाहिए। कई कंपनियां एंप्लॉयीज का बेसिक पे कम रखती हैं। आम तौर पर यह सीटीसी का 30-35 फीसदी होता है। बाकी सैलरी में एचआरए, स्पेशल अलाउन्स और कनवेंस जैसे अलाउन्सेज शामिल होते हैं। इससे सैलरी में जरूरी डिडक्शंस कम रहता है, जिससे एंप्लॉयीज की टेक-होम सैलरी ज्यादा रहती है।

सैलरी के कई कंपोनेंट्स बेसिक सैलरी से लिंक्ड होते हैं

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