इगास महोत्सव, जिसे बुढ़ी दीवाली के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दीवाली के ग्यारह दिन बाद, कार्तिक महीने की एकादशी को मनाया जाता है और इसे भगवान राम की अयोध्या वापसी की खुशी में मनाने की परंपरा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब अयोध्या में भगवान राम की विजय पर दीवाली मनाई जा रही थी, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इस समाचार के पहुंचने में देरी हुई, इसलिए यहां की जनता ने ग्यारह दिन बाद दीवाली मनाई। इगास के दिन घरों और गांवों में दीप जलाए जाते हैं, पारंपरिक नृत्य ‘छोलिया’ किया जाता है, और विशिष्ट पकवान जैसे कि ‘सिंगल’ और ‘बाड़ा’ बनाए जाते हैं।