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एक लाख रुपये सैलरी तो दिल्ली-NCR में किराए पर रहें या होम लोन लेकर खरीदें घर? एक्सपर्ट से जानें फॉर्मूला और EMI का पूरा कैलकुलेशन

दिल्ली में प्रॉपर्टी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में घर खरीदना लंबे समय में संपत्ति बनाने का एक तरीका हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति ₹50 लाख में घर खरीदता है और भविष्य में उसकी कीमत बढ़ती है, तो उसे फायदा होता है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Oct 10, 2026 पर 4:48 PM
एक लाख रुपये सैलरी तो दिल्ली-NCR में किराए पर रहें या होम लोन लेकर खरीदें घर? एक्सपर्ट से जानें फॉर्मूला और EMI का पूरा कैलकुलेशन
बैंक होम लोन देते समय कई बातों पर ध्यान देते हैं, जिसमें एप्लीकेंट की महीने की सैलरी, मौजूदा कर्ज़, क्रेडिट प्रोफ़ाइल और EMI चुकाने की क्षमता शामिल है।

दिल्ली जैसे महंगे शहर में घर खरीदना मिडिल क्लास परिवारों के लिए एक बड़ा फैसला होता है। किराया का दो रूम का घर 25,000 से 30,000 रुपये प्रति महीने के रेट से मिल जाता है। लेकिन, घर खरीदने के लिए लंबी अवधि का लोन लेना पड़ता है। सवाल है कि क्या किराए के बजाय घर खरीदना फायदेमंद है?

किराया देने से बेहतर है EMI भरना?

एक्सपर्ट आकाश जिंदल के मुताबिक, "अगर किसी व्यक्ति की इनकम स्टेबल है और वह हर महीने आसानी से होम लोन की EMI दे सकता है, तो उसे अपना घर खरीदने के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि किराए पर रहने से EMI चुकाने का बोझ नहीं रहता है। लेकिन, घर खरीदने का फैसला सिर्फ किराए और EMI के आधार पर नहीं करना चाहिए। डाउन पेमेंट, इंटरेस्ट, प्रॉपर्टी की कीमत, मेंटेनेंस और दूसरे खर्चों को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है।"

दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने का क्या है फायदा?

जिंदल का कहना है कि दिल्ली में प्रॉपर्टी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में घर खरीदना लंबे समय में संपत्ति बनाने का एक तरीका हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति ₹50 लाख में घर खरीदता है और भविष्य में उसकी कीमत बढ़ती है, तो उसे फायदा होता है। हालांकि, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि प्रॉपर्टी की कीमत कितनी बढ़ेगी या कितने समय में बढ़ेगी। यह लोकेशन, हालत और मार्केट के ट्रेंड्स पर निर्भर करता है।

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