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लोगों को रास आ रहा है नया टैक्स सिस्टम, अब तक 5.5 करोड़ टैक्सपेयर्स ने चुना यह विकल्प

वित्त वर्ष 2023-24 में नए टैक्स सिस्टम के तहत 7 लाख रुपये तक की इनकम पर छूट का प्रावधान है। एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में अब तक तकरीबन 5.5 करोड़ टैक्सपेयर्स नए टैक्स सिस्टम का विकल्प चुन चुके हैं। ऐसे ज्यादातर टैक्सपेयर्स की सालाना इनकम 7 लाख रुपये तक है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 21, 2023 पर 2:17 PM
लोगों को रास आ रहा है नया टैक्स सिस्टम,  अब तक 5.5 करोड़ टैक्सपेयर्स ने चुना यह विकल्प
नए टैक्स सिस्टम में 7.27 लाख की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता है।

New Tax Regime: फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में नए टैक्स सिस्टम का विकल्प लोगों को ज्यादा रास आ रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में नए टैक्स सिस्टम के तहत 7 लाख रुपये तक की इनकम पर छूट का प्रावधान है। एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में अब तक तकरीबन 5.5 करोड़ टैक्सपेयर्स नए टैक्स सिस्टम का विकल्प चुन चुके हैं। इसमें कहा गया है कि ऐसे ज्यादातर टैक्सपेयर्स की सालाना इनकम 7 लाख रुपये तक है।

रिपोर्ट में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना था, 'अगर 5.5 करोड़ टैक्सपेयर्स ने नया टैक्स सिस्टम चुना है, तो इसमें किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। 7.5 से 8 लाख या 10 लाख तक सालाना आय वाले भी इनकम टैक्स में सीधा-सीधा रास्ता चाहते हैं।'

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023-24 में टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स में राहत का ऐलान किया है। हालांकि, पुराने टैक्स सिस्टम में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन नए टैक्स सिस्टम के तहत छूट की सीमा बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दी गई है। पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी। इसका मतलब यह है कि 7 लाख रुपये सालाना तक की आय वाले को किसी तरह का टैक्स नहीं देना होगा।

इसके अलावा, सरकार ने वित्त अधिनियम 2023 के मुताबिक, 27,000 रुपये की अतिरिक्त राहत भी दी गई है यानी कुल मिलाकर 7.27 लाख रुपये तक की आय टैक्स-फ्री होगी।

अधिकारी का यह भी कहना था कि अगर टैक्सपेयर्स को बाद में पुराना टैक्स सिस्टम ज्यादा फायदेमंद लगता है, तो वे फिर से पुराने सिस्टम का विकल्प भी चुन सकते हैं। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में कितने लोगों ने नए टैक्स सिस्टम का विकल्प चुना है, इस बारे में ठीक-ठीक आंकड़ा अगले एसेसमेंट ईयर (2024-25) में पता चल पाएगा।

इनकम टैक्स विभाग के 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, 4.84 टैक्सपेयर्स की इनकम 5 लाख तक की थी, जबकि 1.12 करोड़ टैक्सपेयर्स की टैक्सेबल इनकम 5 से 10 लाख के बीच थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 से 20 लाख तक की आय वाले टैक्सपेयर्स की संख्या 47 लाख थी। 20 से 50 लाख तक की आय वाले टैक्सपेयर्स की संख्या 20 लाख थी, जबकि 3.8 लाख टैक्सपेयर्स ऐसे थे, जिनकी इनकम 50 लाख से 1 करोड़ के बीच थी। इसके अलावा, 2.6 लाख टैक्सपेयर्स की इनकम 1 करोड़ से ज्यादा थी।

नए टैक्स सिस्टम में 7.27 लाख की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता है। हालांकि, इसमें किसी तरह की अन्य छूट हासिल नहीं की जा सकती। पुराने सिस्टम में 2.5 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता है। इसके अलावा, इनकम टैक्स कानून के प्रावधानों के तहत निवेश और अन्य खर्चों पर भी छूट हासिल की जा सकती है।

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